उत्तरकाशी, जन एक्सप्रेस। समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने और ग्रामीणों की समस्याओं को करीब से समझने के उद्देश्य से उत्तरकाशी जिले के डुंडा ब्लॉक स्थित ग्राम कमद में ‘एक घंटा समाज के नाम’ अभियान के तहत सेवा, स्वच्छता और संवाद का संदेश दिया गया। गाजणा मंडल की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में अनुसूचित जाति बस्ती में स्वच्छता अभियान चलाने के साथ ही बुजुर्गों और विधवा महिलाओं से संवाद कर उनकी समस्याओं और सरकारी योजनाओं से जुड़े अनुभवों की जानकारी ली गई।कार्यक्रम का आयोजन गाजणा मंडल संयोजक एवं एनजीओ प्रकोष्ठ संयोजक राजमणि के नेतृत्व में किया गया। अभियान के दौरान कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने मिलकर श्रमदान किया और बस्ती के आसपास साफ-सफाई की। इस पहल के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ समाज के प्रति जिम्मेदारी और सेवा भाव का संदेश देने का प्रयास किया गया।
बुजुर्गों और महिलाओं से किया विशेष संवाद
कार्यक्रम का एक प्रमुख उद्देश्य केवल स्वच्छता अभियान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ग्रामीणों के साथ सीधे संवाद के जरिए उनकी वास्तविक समस्याओं और जरूरतों को समझना भी रहा। इस दौरान गांव के बुजुर्गों और विधवा महिलाओं से विशेष रूप से बातचीत की गई। उनसे सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने की स्थिति, सामने आने वाली परेशानियों और प्रशासनिक स्तर पर आवश्यक सहयोग को लेकर फीडबैक लिया गया। ग्रामीणों ने भी विभिन्न सरकारी योजनाओं को लेकर अपने अनुभव साझा किए। पात्र महिलाओं को मिल रही सुविधाओं के बारे में जानकारी ली गई और यह समझने का प्रयास किया गया कि योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर पर किस तरह पहुंच रहा है।
सरकारी योजनाओं की दी गई जानकारी
अभियान के दौरान ग्रामीणों को सरकार की ओर से संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के बारे में जानकारी दी गई। कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि पात्र व्यक्ति योजनाओं से वंचित न रहें और उन्हें सरकारी सुविधाओं का लाभ लेने के लिए आवश्यक जानकारी उपलब्ध हो। आयोजकों ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में कई बार जानकारी के अभाव में पात्र लोग योजनाओं का लाभ नहीं उठा पाते हैं। ऐसे में संवाद और जागरूकता के माध्यम से लोगों को उनके अधिकारों और उपलब्ध सुविधाओं के बारे में जानकारी देना बेहद जरूरी है।
श्रमदान कर दिया स्वच्छता का संदेश
गाजणा मंडल संयोजक राजमणि ने ग्रामीणों के साथ स्वयं श्रमदान कर स्वच्छता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि समाज को मजबूत बनाने के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए आगे आना होगा।उन्होंने कहा कि सेवा, संस्कार, समर्पण, स्वच्छता और संवाद ही एक सशक्त समाज की नींव हैं। ‘एक घंटा समाज के नाम’ अभियान का उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना और जरूरतमंद लोगों की समस्याओं को समझना है। उन्होंने कहा कि जब लोग सामूहिक रूप से समाज के लिए समय निकालते हैं तो उसका सकारात्मक असर सीधे जमीनी स्तर पर दिखाई देता है।
ग्रामीणों ने साझा किए अपने अनुभव
कार्यक्रम में मौजूद ग्रामीणों, बुजुर्गों और महिलाओं ने सरकारी योजनाओं को लेकर अपने अनुभव साझा किए। बातचीत के दौरान ग्रामीणों ने योजनाओं से मिलने वाले लाभ और उनसे जुड़ी अपनी अपेक्षाओं के बारे में जानकारी दी।आयोजन ने यह संदेश दिया कि समाज और ग्रामीण समुदाय के बीच लगातार संवाद बनाए रखने से स्थानीय समस्याओं को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है। साथ ही सामूहिक श्रमदान और जागरूकता के प्रयास गांवों में स्वच्छता तथा सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।‘एक घंटा समाज के नाम’ की यह पहल सेवा और संवाद को केंद्र में रखते हुए ग्रामीणों के बीच सामाजिक जिम्मेदारी की भावना मजबूत करने की दिशा में एक प्रयास के रूप में सामने आई। कमद गांव में आयोजित कार्यक्रम ने यह भी दिखाया कि जब समाज स्वयं आगे बढ़कर बदलाव की जिम्मेदारी लेता है, तो सकारात्मक परिवर्तन की शुरुआत जमीनी स्तर से होती है।






