
जन एक्सप्रेस/ हरिद्वार: देव संस्कृति विश्वविद्यालय (DSVV) में वंदनीया माताजी के जन्मशताब्दी वर्ष के पावन अवसर पर विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास हेतु एक अनूठी पहल की गई। विद्यार्थियों के बौद्धिक, भावनात्मक एवं वैचारिक स्तर को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से “एक पुस्तक हाथ में-विचार क्रांति साथ में” विषय पर युग साहित्य स्वाध्याय शृंखला का भव्य आयोजन किया गया।
विद्यार्थियों द्वारा-विद्यार्थियों के लिए पहल
यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय के ‘संभावना’ (भाषा, लेखन, संचार और प्रकाशन क्लब) – देव संस्कृति स्टूडेंट्स क्लब द्वारा आयोजित किया गया। इस आयोजन की खास बात यह रही कि इसे ‘विद्यार्थियों द्वारा-विद्यार्थियों के लिए’ की भावना के साथ संचालित किया गया। विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या की प्रेरणा से शुरू हुई इस शृंखला का मुख्य लक्ष्य छात्रों में स्वाध्याय (Self-study) की प्रवृत्ति को जागृत करना और अध्ययन मंडलों को अधिक सक्रिय बनाना है।
सामूहिक चर्चा से वैचारिक मंथन
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने युग साहित्य के चयनित अंशों का गहन अध्ययन किया और उन पर अपने मौलिक विचार प्रस्तुत किए। सामूहिक चर्चा के माध्यम से न केवल विषयों की गहराई को समझा गया, बल्कि छात्रों ने वक्ता, श्रोता और विचारक की भूमिका निभाते हुए अपने आत्मविश्वास को भी निखारा।
अभिव्यक्ति कौशल और सकारात्मक दृष्टिकोण का विकास
इस आयोजन ने विद्यार्थियों को एक ऐसा मंच प्रदान किया जहाँ वे अपने विचारों का आदान-प्रदान कर सके। इस पहल के माध्यम से विश्वविद्यालय में पठन संस्कृति (Reading Culture) को बढ़ावा देने और समाज में सकारात्मक एवं मूल्यपरक दृष्टिकोण विकसित करने का सशक्त संदेश दिया गया।
मुख्य संदेश: कार्यक्रम के समापन पर यह निष्कर्ष निकला कि जब हाथ में श्रेष्ठ पुस्तक होती है और उसका गंभीरता से अध्ययन किया जाता है, तो विचारों में सकारात्मक क्रांति स्वतः ही जन्म लेती है।





