कमिश्नर ने बोट में बैठकर गंगा में गिर रहे नालों का किया निरीक्षण

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जन एक्सप्रेस संवाददाता
कानपुर नगर। बोट में सवार होकर कानपुर कमिश्नर डॉ. राज शेखर ने गंगा में प्रदूषण फैला रहे नालों की हकीकत जानने के लिए गंगा बैराज से सिद्धनाथ घाट जाजमऊ तक हाल जाना तो इसी दौरान उन्हें गोलाघाट व डबका नाला गंगा में गिरता हुआ मिला। वहीं घाटों व नालों के किनारे गंदगी भी मिली। कमिश्नर ने अब इन सभी नालों की निगरानी ड्रोन कैमरों से कराने के निर्देश दिए हैं। ड्रोन के माध्यम से जैसा इनपुट मिलेगा, उसी आधार पर काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
गंगा में गिर रहे नालों की हकीकत जानने के लिए कमिश्नर ने जलनिगम के महाप्रबंधन अनिल गर्ग के साथ गंगा बैराज के अटल घाट से जाजमऊ के सिद्धनाथ घाट तक जायजा लिया। कानपुर में किसी के भी द्वारा यह 10 किलोमीटर लंबा अब तक सबसे बड़ा निरीक्षण था। इस दौरान गोलाघाट और डबका नाला से गंगा में गंदा पानी गिरता हुआ पाया गया। कमिश्नर ने जब इसकी वजह पूछी तो बताया गया कि बिजली न आने की वजह से ऐसा हुआ है। हालांकि, जलनिगम अफसरों का दावा है कि कुछ ही देर में इस डिस्चार्ज को रोक दिया गया।
जलनिगम जीएम ने कमिश्नर को बताया कि गंगा में गिरने वाले 11 नालों को पूरी तरह से टेप किया जा चुका है जबकि पांच नालों को अस्थायी रूप से प्रवेश बिंदु के पास एक सम्प वेल बनाकर और फिर मोटर पंपों द्वारा अपशिष्ट जल को पास के सीवेज पंपिंग स्टेशन पर पंप करके टैप किया गया है। इन नालों के आसपास कमिश्नर ने एक जनरेटर रखने के निर्देश दिए। जिससे कि बिजली जाने पर गंगा में गंदगी न गिरे। यही नहीं, हर नाले के लिए एक जूनियर इंजीनियर की तैनाती भी की जाएगी। कमिश्नर ने कहा कि जेई प्रतिदिन साइट का दौरा करेगा और दैनिक आधार पर रिपोर्ट देगा।
नाले पूरी तरह से टेप है और उनका डिस्चार्ज आदि गंगा में नहीं गिर रहा है। इसके लिए कमिश्नर ने ड्रोन कैमरों से निगरानी के निर्देश दिए। बैराज से जाजमऊ तक यह कैमरे पूरी स्थिति पर नजर रखेंगे। सभी घाटों और नालों का जीपीएस कोऑर्डिनट्स को ड्रोन कैमरे में फ़ीड किया जाएगा और कंट्रोल रूम से इसकी निगरानी की जाएगी। वहीं, घाटों पर मिली गंदगी के निस्तारण के लिए नगर आयुक्त को 15 दिन की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। यहां पर जलनिगम जीएम ने कमिश्नर के बताया कि नमामि गंगे परियोजना के तहत यूपी सरकार के माध्यम से भारत सरकार को 48 करोड़ का एक प्रोजेक्ट एस्टीमेट भेजा गया है। जो 5 अस्थायी नाला के नजदीकी पम्पिंग स्टेशनों से स्थायी रूप से टैप करने के लिए बनाया गया है। उन्होंने कहा कि इसके स्वीकृत होने के छह माह में काम पूरा कर लिया जाएगा।

 

 

 

 


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