ट्रस्ट का दावा 39 महीने में तैयार हो जाएगा राम मंदिर

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अयोध्या। राममंदिर निर्माण के लिए नींव की खुदाई तेज कर दी गयी है। इसके पहले देश के प्रतिष्ठित भू-वैज्ञानिकों की मदद से कार्यदाई संस्था एलएण्डटी ने राम मंदिर के नींव की डिजाइन को तैयार करा लिया है। इस डिजाइन पर मंदिर निर्माण समिति की औपचारिक मुहर 22 जनवरी को लग जाएगी। इससे पहले 21 जनवरी को वैज्ञानिकों की टीम थ्री डी इमेज के जरिए डिजाइन का प्रजन्टेशन देगी और समिति के सदस्यों की जिज्ञासाओं का समाधान भी करेगी।

रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय डिजाइन को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त हैं। वह कहते हैं कि जितनी प्रमाणिकता के साथ वैज्ञानिकों ने अपना काम किया है, उसके कारण पूरी दुनिया भारत के इंजीनियरिंग ब्रेन को स्वीकार करेगी। वह कहते हैं कि मंदिर निर्माण शुरु करने से पहले भूमिगत परीक्षण करने में सात माह का समय अवश्य लगा है। फिर भी मंदिर निर्माण के मौलिक समय में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। ऐसे में फरवरी2021 से मंदिर निर्माण में 39 माह का समय लगेगा। वह कहते हैं कि मैनुवल कार्य होना है, इसलिए दो-चार प्रतिशत इधर-उधर समय में हेराफेरी हो सकती है लेकिन ज्यादा नहीं होगी। उनका मानना है कि अगस्त तक नींव निर्माण का काम पूरा हो जाएगा। फिर मूल मंदिर का काम होगा।

वर्ष 1990 से 2006 के बीच तराशे गये पत्थरों का पहले उपयोग होगा। यह करीब 70-75 हजार क्यूबिक घनफुट पत्थर है। इस स्थिति में अभी सवा तीन लाख क्यूबिक घनफुट पत्थर अतिरिक्त चाहिए। ट्रस्ट महासचिव का कहना है कि राजस्थान स्थित बंशीपहाड़पुर से यह पत्थर राम मंदिर के लिए आसानी से उपलब्ध हो जाएंगे। वह कहते हैं कि प्रभु राम का कार्य थोड़ा विलंब से होता है लेकिन ईश्वरीय कार्य में बाधा नहीं आ सकती है।

रामजन्मभूमि परिसर में मंदिर निर्माण स्थल पर नींव की खुदाई का काम तेज हो गया है। इस खुदाई में निकले मलबे के निस्तारण का ठेका कार्यदाई संस्था ने एक एजेंसी को दे दिया है। इस एजेंसी के श्रमिक खुदाई में निकले मलबे को कुबेर टीला के ईद-गिर्द डम्प कर मिट्टी व ईंट को अलग-अलग कर रहे हैं।  इस बीच वाहनों के आवागमन के लिए मानस भवन के अग्र व पृष्ठ भाग को छोड़कर मध्य भाग को ढहाकर समतल बना दिया गया है। पुन: इसी रास्ते से कोहबर भवन-राम खजाना को भी ध्वस्त कर उसके मलबे को भी साफ करा दिया गया।


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