प्याज आवश्यक खाद्य होने के साथ महत्वपूर्ण व्यवसायिक फसल भी

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जन एक्सप्रेस संवाददाता
कानपुर नगर। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर के कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह के निर्देश के क्रम में रविवार को कल्याणपुर स्थित सब्जी अनुभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. राम बटुक सिंह ने किसानों के लिए प्याज की उन्नत तकनीक विषय पर एडवाइजरी जारी की। उन्होंने बताया कि प्याज दैनिक जीवन के लिए आवश्यक खाद्य होने के साथ एक महत्वपूर्ण व्यवसायिक फसल भी है। इसकी खेती रवी एवं खरीफ दोनों मौसम में की जाती है। भारत के प्याज की मांग विदेशों में भी अच्छी है। इसलिए हमारा देश प्याज का प्रमुख निर्यातक देश है महत्वपूर्ण आहार के साथ ही यह औषधि के रूप में पीलिया, कब्ज, बवासीर और यकृत संबंधी रोगों में बहुत लाभकारी होता है। उन्होंने बताया कि प्याज की उन्नत किस्मो मे सफेद रंग वाली भीमा शुभरा, भीमा श्वेता, नासिक सफेद, पूसा व्हाइट राउंड जबकि लाल रंग की किस्में भीमा लाल, भीमा सुपर, कल्याणपुर लाल, अर्का प्रगति है। उन्होंने बताया कि प्याज की फसल में नाइट्रोजन 100 से 120 किलोग्राम, फास्फोरस 50 से 60 किलोग्राम, पोटाश 60 से 70 किलोग्राम एवं सल्फर 30 से 35 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर प्रयोग करना चाहिए तथा रोपाई से पहले पौधों की जड़ों को 0.1 फीसदी कार्बेंडाजिम + 0.1 फीसदी मोनोक्रोटोफॉस के घोल में डुबोकर रोपाई करने से पौधे स्वस्थ रहते हैं उन्होंने कहा कि किसानो द्वारा तकनीकी विधियों का प्रयोग करने से 350 से 450 कुंतल प्रति हेक्टेयर प्याज के कंदों की पैदावार होती है।

 


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