
जन एक्सप्रेस देहरादून|पत्रकार को रातभर लॉकअप में रखने के मामले में कोटद्वार के एएसपी चंद्रमोहन सिंह समेत 8 पुलिसकर्मियों पर उत्तराखंड पुलिस शिकायत प्राधिकरण में सुनवाई जारी है। प्रकरण को लेकर प्राधिकरण ने शिकायत को गंभीर मानते हुए संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ जांच प्रक्रिया शुरू की है और जल्द ही फैसला सुनाए जाने की संभावना है।उत्तराखंड पुलिस पर कथित दमनात्मक कार्रवाई के आरोप कोई नए नहीं हैं। आए दिन सोशल मीडिया पर पुलिस प्रताड़ना से जुड़े वीडियो सामने आते रहते हैं, जिससे आम जनता का भरोसा पुलिस व्यवस्था से कमजोर होता जा रहा है।यह मामला इसी वर्ष जनवरी माह का है, जब कोटद्वार निवासी पत्रकार सुधांशु थपलियाल को देर रात उनके घर से उठाकर थाने ले जाया गया और पूरी रात लॉकअप में रखा गया। पत्रकार ने इस कार्रवाई को अवैध और बदले की भावना से प्रेरित बताया है।घटना की पृष्ठभूमि में कोटद्वार में एक दर्दनाक सड़क हादसा शामिल है, जिसमें कार की टक्कर से युवती अंजली की मौके पर ही मौत हो गई थी। हादसे के 12 दिन बाद भी जब पुलिस आरोपी चालक को गिरफ्तार नहीं कर पाई, तो मृतका की मां ने पत्रकार से मदद की गुहार लगाई थी।इसके बाद पत्रकार सुधांशु थपलियाल ने अपने फेसबुक पेज पर एक पोस्ट साझा की थी। आरोप है कि इसी पोस्ट से नाराज होकर एएसपी चंद्रमोहन सिंह, इंस्पेक्टर रमेश तनवर समेत 7 पुलिसकर्मी देर रात पत्रकार के घर पहुंचे और उन्हें थाने ले गए। वहां पत्रकार के खिलाफ मानहानि समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें रातभर हिरासत में रखा गया।पत्रकार ने इस कार्रवाई के खिलाफ पुलिस शिकायत प्राधिकरण देहरादून में शिकायत दर्ज कराई, जहां प्राधिकरण ने पत्रकार द्वारा प्रस्तुत तथ्यों को प्रथम दृष्टया सही मानते हुए सुनवाई शुरू कर दी।उल्लेखनीय है कि पत्रकार की गिरफ्तारी के अगले ही दिन पुलिस ने आरोपी कार चालक को गिरफ्तार कर लिया था। इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस की कार्यशैली और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।






