कड़ाके की ठंड से जमी गंगोत्री की धाराएं, माइनस 10 तक पहुंचा पारा

जन एक्सप्रेस उत्तरकाशी।उत्तरकाशी जिले में इन दिनों कड़ाके की ठंड अपने चरम पर पहुंच गई है। खासकर ऊंचाई वाले इलाकों में तापमान शून्य से नीचे चला गया है। गंगोत्री नेशनल पार्क क्षेत्र से सामने आई ताजा तस्वीरों में नदी-नाले और झरने जमे हुए नजर आ रहे हैं। यहां तापमान माइनस 10 डिग्री सेल्सियस तक गिर चुका है, जिससे प्राकृतिक जल स्रोत ठोस बर्फ में तब्दील हो गए हैं।
बिना बर्फबारी के बढ़ी ठंड
हाल के दिनों में गंगोत्री धाम और आसपास के क्षेत्रों में न तो बारिश हुई और न ही बर्फबारी, इसके बावजूद न्यूनतम तापमान लगातार माइनस 1 से माइनस 10 डिग्री के बीच बना हुआ है। हर्षिल घाटी में दिन का अधिकतम तापमान चार से पांच डिग्री तक पहुंच रहा है, लेकिन शाम चार बजे के बाद यह तेजी से गिरकर रात में माइनस 8 डिग्री तक चला जाता है।
जमी पेयजल लाइनें, पानी का संकट
भीषण ठंड के कारण गंगोत्री धाम क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। पाइपों में जमी बर्फ के कारण लोहे की जल लाइनें फट गई हैं, जिससे स्थानीय लोगों और तैनात कर्मचारियों को पानी की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। जरूरत पूरी करने के लिए लोग जमी बर्फ को जलाकर पिघलाने को मजबूर हैं।
गोमुख ट्रैक पर बढ़ा खतरा
गत मंगलवार को वन विभाग की टीम ने गोमुख ट्रैक पर गश्त के दौरान पांच से सात स्थानों पर जल स्रोत पूरी तरह जमे हुए पाए। कई जगह पतली जल धाराएं भी बर्फ में बदल गई हैं, जिससे ट्रैक पर फिसलन बढ़ गई है और दुर्घटनाओं का खतरा बना हुआ है।
शीतकाल में वन्यजीवों पर कड़ी नजर
गंगोत्री नेशनल पार्क प्रबंधन ने शीतकाल में वन्यजीवों की गतिविधियों और अवैध शिकार पर निगरानी के लिए गोमुख, केदारताल ट्रैक और नेलांग घाटी में करीब 50 ट्रैप कैमरे लगाए हैं। 10 से 13 हजार फीट की ऊंचाई पर लगे ये कैमरे स्नो लेपर्ड, भरल, भूरा भालू और कस्तूरी मृग जैसी दुर्लभ प्रजातियों की मौजूदगी और मूवमेंट पर नजर रख रहे हैं।
बढ़ती ठंड में ड्यूटी बनी चुनौती
अधिकारियों के अनुसार लगातार गिरते तापमान के बीच क्षेत्र में तैनात कर्मचारियों के लिए ड्यूटी करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है। इसके बावजूद सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को बनाए रखने के लिए लगातार गश्त और निगरानी की जा रही है।






