
जन एक्सप्रेस/हरिद्वार: चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर अखिल विश्व गायत्री परिवार का मुख्यालय शांतिकुंज इन दिनों दिव्यता और सकारात्मक ऊर्जा से सराबोर है। यहाँ देश-विदेश से आए हजारों साधक आत्मशुद्धि और विश्व कल्याण के संकल्प के साथ ‘नवरात्रि साधना’ में लीन हैं। हरिद्वार का यह पावन परिसर इस समय जप, तप और ध्यान का वैश्विक केंद्र बन गया है।
‘वसुधैव कुटुंबकम’ के सिद्धांत पर सामूहिक प्रार्थना
इस वर्ष की साधना का मूल आधार ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का महान भारतीय आदर्श है। साधना शिविर में हिस्सा ले रहे हजारों साधक न केवल व्यक्तिगत आध्यात्मिक उन्नति के लिए प्रयास कर रहे हैं, बल्कि सामूहिक रूप से विश्व शांति, मानव एकता और प्रकृति के संतुलन के लिए भी आहुतियां दे रहे हैं। यज्ञ और मंत्रोच्चार की गूँज से संपूर्ण वातावरण देशभक्ति और देवभक्ति से ओत-प्रोत हो गया है।
साधना से समाज निर्माण का संकल्प: डॉ. चिन्मय पण्ड्या
अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा प्रतिनिधि डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने साधना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा:
“नवरात्रि साधना केवल व्यक्तिगत लाभ का अवसर नहीं है, बल्कि यह आत्मपरिष्कार के माध्यम से समाज निर्माण का एक सशक्त मार्ग है। जब हजारों साधक एक साथ सकारात्मक संकल्प लेते हैं, तो उसका प्रभाव संपूर्ण विश्व की चेतना पर पड़ता है। ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना को व्यवहार में उतारना ही हमारा मुख्य उद्देश्य है।”
जीवन जीने की कला का प्रशिक्षण
शांतिकुंज में आयोजित यह शिविर केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है। यहाँ साधकों को:
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अनुशासन और संयम: दैनिक जीवन में सुव्यवस्था का अभ्यास।
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नैतिक मूल्य: चरित्र निर्माण और मानवीय संवेदनाओं का विकास।
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सेवा भाव: समाज के प्रति अपने उत्तरदायित्वों का बोध।
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सकारात्मक ऊर्जा: ध्यान और सत्संग के जरिए मानसिक शांति।
वैश्विक सद्भाव का प्रेरणास्रोत
शांतिकुंज अपनी इस सामूहिक साधना के माध्यम से एक ऐसे समाज की परिकल्पना को साकार कर रहा है, जहाँ प्रेम, सहयोग और एकता का वास हो। यहाँ से निकलने वाली आध्यात्मिक तरंगें न केवल व्यक्ति को भीतर से शांत करती हैं, बल्कि समाज में भी सद्भाव का वातावरण निर्मित कर रही हैं।






