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जौनपुर: टयूलिप हॉस्पिटल में करंट से हुई महिला की मौत, कोर्ट के जरिए डॉक्टरों ने दी 5.25 लाख रुपए की क्षतिपूर्ति

जन एक्सप्रेस/जौनपुर: उत्तर प्रदेश के जौनपुर शहर स्थित ट्यूलिप हार्ट एंड सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में एक दर्दनाक हादसे में अपनी जान गंवाने वाली महिला के परिवार को आखिरकार न्याय मिला है। वाटर कूलर से पानी लेने के दौरान करंट लगने से हुई महिला की मौत के मामले में लापरवाही के दोषी पाए गए दो डॉक्टरों और मैनेजर ने दीवानी न्यायालय के स्थाई लोक अदालत में 5.25 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति राशि जमा की। यह राशि मृतका गुड़िया के पति प्रदीप कुमार गौड़ को चेक के जरिए सौंप दी गई है।

क्या था पूरा मामला? (H2)

यह मामला सुइथाकला, शाहगंज के निवासी प्रदीप कुमार गौड़ से जुड़ा है। प्रदीप ने अपने दो बच्चों के साथ स्थाई लोक अदालत के अध्यक्ष लालचंद गुप्ता के समक्ष ट्यूलिप हॉस्पिटल के डॉक्टर उत्पल कुमार शर्मा, डॉक्टर मोहसिन जफर और मैनेजर उज्जवल कुमार सिंह के खिलाफ परिवाद (केस) दाखिल किया था।

परिवाद के अनुसार, प्रदीप ने अपनी मां लालती देवी को इलाज के लिए 28 सितंबर 2025 से 1 अक्टूबर 2025 तक इस हॉस्पिटल में भर्ती कराया था। प्रदीप की पत्नी गुड़िया अपनी सास की देखरेख के लिए अस्पताल में ही रुकी हुई थी। 30 सितंबर 2025 को सुबह करीब 10:30 बजे जब गुड़िया अस्पताल परिसर में लगे वाटर कूलर से पानी लेने गई, तभी अचानक उसमें उतरे करंट की चपेट में आने से वह जमीन पर गिर पड़ी।

अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप (H2)

आरोप है कि घटना के बाद अस्पताल के डॉक्टरों ने गुड़िया का प्राथमिक इलाज करने या उसे ठीक से चेक करने के बजाय आनन-फानन में उसे जिला चिकित्सालय रेफर कर दिया। जब परिजन उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, तो वहां के डॉक्टरों ने गुड़िया को मृत घोषित कर दिया।

पीड़ित परिवार और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना था कि अस्पताल प्रबंधन की घोर लापरवाही और उपेक्षा के कारण यह हादसा हुआ। पुलिस ने भी इस मामले की तफ्तीश कर आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी थी।

राजीनामे के बाद प्रदान की गई सहायता राशि (H2)

पीड़ित प्रदीप कुमार गौड़ का कहना था कि चूंकि टयूलिप एक सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल है, जहाँ हार्ट के गंभीर मरीजों का इलाज होता है, ऐसे में यदि डॉक्टरों ने तत्काल गुड़िया को इमरजेंसी इलाज दिया होता तो उसकी जान बच सकती थी।

मामले की गंभीरता और कानूनी कार्रवाई को देखते हुए विपक्षी (डॉक्टर और मैनेजर) कोर्ट में पीड़ित परिवार को 5.25 लाख रुपये बतौर क्षतिपूर्ति देने के लिए सहमत हो गए। उन्होंने यह धनराशि चेक के जरिए अदालत में जमा की, जिसे परिवादी प्रदीप कुमार गौड़ को सौंपकर मामले का निस्तारण किया गया।

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