जौनपुर: एसएसपी कुंवर अनुपम सिंह की संवेदनशीलता से जगी न्याय की आस, 8 महीने से भटक रही दलित पीड़िता की सुनी गई फरियाद

जन एक्सप्रेस/ जौनपुर : जौनपुर से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने “मित्र पुलिस” के नारे को चरितार्थ किया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) कुंवर अनुपम सिंह की एक मानवीय पहल ने न केवल एक बेबस महिला को न्याय की उम्मीद दी है, बल्कि पूरे जनपद में चर्चा का विषय बन गई है।
क्या है पूरा मामला?
मामला थाना नेवढ़िया के ग्राम रसुलहा का है। पीड़िता नीतू देवी के अनुसार, 9 अप्रैल 2026 की सुबह उन पर पुरानी रंजिश को लेकर दबंगों ने जानलेवा हमला किया था। पीड़िता का आरोप है कि:
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पड़ोसियों ने लाठी-डंडों से मारपीट की और गाली-गलौज की।
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उन्हें आग लगाकर गंभीर रूप से झुलसाने का प्रयास किया गया।
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हमलावरों ने गले से मंगलसूत्र भी छीन लिया।
व्यवस्था की मार: 8 महीने का लंबा इंतजार
हैरानी की बात यह है कि घटना के बाद जब पीड़िता नेवढ़िया थाने पहुंची, तो न्याय मिलने के बजाय उसे डांट-फटकार कर भगा दिया गया। पुलिस की इस बेरुखी के कारण एक दलित महिला पिछले 8 महीनों से न्याय के लिए दर-दर भटकती रही। स्थानीय स्तर पर सुनवाई न होने से दबंगों के हौसले और बुलंद थे।
एसएसपी की चौखट पर मिला सम्मान और समाधान
थक-हारकर जब नीतू देवी एसएसपी कार्यालय पहुंची, तो वहां का माहौल बदला हुआ था। एसएसपी कुंवर अनुपम सिंह ने न केवल पीड़िता की पूरी बात को धैर्यपूर्वक सुना, बल्कि मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि अपराधियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
“साहब गरीबों और दबे-कुचलों की आवाज बनकर आए हैं। पहली बार किसी बड़े अधिकारी ने हमारी बात को गंभीरता से सुना है।” — नीतू देवी (पीड़िता)






