उत्तर प्रदेशहरदोई

भगवान श्रीराम को बनाएं जीवन का आदर्श, तभी होगा मानव कल्याण : आचार्य जितेंद्र कृष्ण मिश्र

जन एक्सप्रेस/हरदोई  मल्लावां के प्रज्ञाधाम बड़ी बाजार में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में कथा व्यास आचार्य जितेंद्र कृष्ण मिश्र ने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को आदर्श जीवन का संदेश दिया।

उन्होंने कहा कि भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने का माध्यम है। व्यक्ति को अपने जीवन में फिल्मी नायकों के बजाय भगवान श्रीराम को आदर्श मानकर उनके चरित्र और मर्यादाओं को अपनाना चाहिए। श्रीराम का जीवन त्याग, अनुशासन, सेवा और कर्तव्यनिष्ठा का सर्वोत्तम उदाहरण है।

आचार्य मिश्र ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को प्रातःकाल उठकर अपने माता-पिता एवं गुरुजनों का सम्मान करना चाहिए और दिनचर्या को आदर्श मूल्यों के अनुरूप बनाना चाहिए। उन्होंने बताया कि यदि प्रत्येक कार्य को भगवान की भक्ति से जोड़कर किया जाए तो जीवन का हर कर्म पूजा बन जाता है। अच्छे कर्म ही सफलता का आधार हैं और इसी कारण कहा गया है कि “कर्म ही पूजा है।”

श्री सीताराम विवाह प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान राम ब्रह्म के प्रतीक हैं और माता सीता भक्त स्वरूप हैं। भगवान और भक्त का वास्तविक मिलन तभी संभव है जब अहंकार का त्याग किया जाए। उन्होंने कहा कि मानव को अपने जीवन से अभिमान को समाप्त कर विनम्रता को अपनाना चाहिए, तभी आध्यात्मिक उन्नति संभव है।

इस अवसर पर पूर्व चेयरमैन प्रत्याशी एवं समाजसेवी रागिनी जायसवाल, आरएसएस नगर कार्यवाह संतोष शुक्ला तथा शांति सत्संग मंच के संयोजक प्रकाश चन्द्र गुप्ता ने व्यास पीठ का पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

श्रीमद्भागवत कथा का मूल पाठ एवं वैदिक अनुष्ठान कथा परीक्षित गिरीश चन्द्र सोनी द्वारा कराया गया, जबकि आचार्य कुलदीप शुक्ला, ऋषभ दीक्षित एवं शिखर मिश्रा ने विधि-विधान से पूजन-अर्चन संपन्न कराया।

कथा के समापन पर आयोजक विपिन सोनी, जितेंद्र सोनी, नितिन सोनी और गौरव सोनी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान की आरती उतारकर विश्व शांति और मानव कल्याण की कामना की। कार्यक्रम की सफलता में अभिनव पटेल, आकाश ओमर, राम भरोसे गौर, कप्तान यादव, कमलेश, सृजन सोनी, अंश, सम्राट तथा महिला मंडल की उमा सोनी, शैली सोनी, पूजा सोनी, गौरी सोनी और प्रगति सोनी सहित अनेक श्रद्धालुओं का विशेष योगदान रहा।

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