
जन एक्स्प्रेस उत्तराखंड
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद में विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर व्यापक जागरूकता अभियान चलाया गया। “आकर्षण का पर्दाफाश: निकोटीन की लत को पहचानो, जिंदगी को चुनो” थीम के तहत युवाओं और आम नागरिकों को तंबाकू के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया गया।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. बी.एस. रावत के मार्गदर्शन में जिलेभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। रामचन्द्र उनियाल राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और एनसीसी कैडेट्स ने योगाभ्यास किया और तंबाकू से दूर रहने की शपथ ली। सभी ने संकल्प लिया कि वे स्वयं तंबाकू का सेवन नहीं करेंगे और अपने परिवार व मित्रों को भी इससे दूर रहने के लिए प्रेरित करेंगे।
कार्यक्रम के दौरान जिला सलाहकार ज्ञानेन्द्र सिंह पंवार ने तंबाकू के खतरों से जुड़े चौंकाने वाले आंकड़े प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि दुनिया में हर वर्ष लगभग 80 लाख लोगों की मौत तंबाकू के कारण होती है, यानी हर 4 सेकंड में एक व्यक्ति की जान जाती है। भारत में यह आंकड़ा करीब 13 लाख मौतों का है, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है। उन्होंने यह भी बताया कि 13 से 15 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 8 से 9 प्रतिशत किशोर तंबाकू उत्पादों का सेवन कर रहे हैं, जो एक चिंताजनक संकेत है।
विशेषज्ञों ने बताया कि तंबाकू केवल एक आदत नहीं बल्कि गंभीर स्वास्थ्य जोखिम है, जो कैंसर, टीबी, अस्थमा, हृदय रोग, बांझपन और अन्य घातक बीमारियों का कारण बनता है। यहां तक कि तंबाकू का सेवन न करने वाले लोग भी सेकंड हैंड स्मोक के कारण बीमार हो रहे हैं।
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि तंबाकू कंपनियां अपने उत्पादों को आकर्षक पैकेजिंग और विज्ञापनों के जरिए “स्टाइल” और “दोस्ती” का प्रतीक बनाकर पेश करती हैं, जबकि वास्तविकता में यह एक खतरनाक लत है जो जीवन को छोटा कर देती है।
इस अवसर पर लोगों को तीन प्रमुख संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया गया—स्वयं तंबाकू से दूर रहना, दूसरों को इसके नुकसान के बारे में जागरूक करना और सार्वजनिक स्थानों पर तंबाकू के उपयोग के खिलाफ आवाज उठाना।
डॉ. एमपीएस राणा, डॉ. परेंद्र सिंह जयाड़ा, योग प्रशिक्षक पूजा और सामाजिक कार्यकर्ता सोनिया बिष्ट ने कहा कि तंबाकू मुक्त समाज के लिए परिवार, शिक्षक और समाज की संयुक्त भूमिका जरूरी है। उन्होंने बताया कि नशा उन्मूलन समिति अब स्कूलों और कॉलेजों में जाकर लगातार जागरूकता अभियान चलाएगी।
यह कार्यक्रम केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को स्वस्थ और नशा मुक्त बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। उत्तरकाशी के लोगों ने “नो स्मोकिंग, नो गुटखा, यस लाइफ” का संदेश देकर एक सकारात्मक पहल की शुरुआत की है।






