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उत्तरकाशी के शवील गांव में आज भी जीवित है लाल धान रोपाई की सदियों पुरानी परंपरा, पूजा-अर्चना के साथ होती है शुरुआत

जन एक्सप्रेस /पुरोला  उत्तरकाशी जनपद के पुरोला प्रखंड स्थित शवील गांव में आज भी लाल धान की रोपाई की सदियों पुरानी परंपरा पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाई जाती है। यह परंपरा स्थानीय संस्कृति, पारंपरिक कृषि और सामूहिक सहयोग का अनूठा उदाहरण मानी जाती है।

ग्रामीणों के अनुसार गांव में लाल धान की रोपाई की शुरुआत प्रत्येक वर्ष गांव के सयाणा द्वारा विधि-विधान एवं पूजा-अर्चना के साथ की जाती है। इसके बाद पूरे गांव के लोग सामूहिक रूप से खेतों में उतरकर रोपाई का कार्य करते हैं। यह परंपरा न केवल खेती से जुड़ी है, बल्कि गांव में आपसी सहयोग, एकता और भाईचारे की भावना को भी मजबूत करती है।

लाल धान अपनी विशेष गुणवत्ता, पौष्टिकता और बेहतरीन स्वाद के लिए प्रसिद्ध है। ग्रामीणों का मानना है कि यह स्थानीय जलवायु और मिट्टी के अनुकूल होने के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है।

रोपाई के दौरान महिलाएं और पुरुष पारंपरिक लोकगीत गाते हुए खेतों में कार्य करते हैं, जिससे पूरा वातावरण उत्सवमय और सांस्कृतिक रंगों से सराबोर हो जाता है।

गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और खुशी की बात है कि आज का युवा वर्ग भी इसे पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ा रहा है। इससे पारंपरिक कृषि पद्धतियों के संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय सांस्कृतिक विरासत भी सुरक्षित बनी हुई है।

इस अवसर पर पूर्व विधायक मालचंद, सरदार सिंह चौहान, महेंद्र सिंह चौहान, नवनीत चौहान, आनंद चौहान, रमन, अंकित, ज्ञानेंद्र, विकास, दिनेश चौहान, ज्ञान लाल, चतर सिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

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