हरिद्वार। रिपोर्ट – चंद्रप्रकाश बहुगुणा
माता भगवती देवी शर्मा के जन्मशताब्दी वर्ष के अवसर पर गायत्री तीर्थ शांतिकुंज, हरिद्वार की ओर से चलाया जा रहा नारी जागरण अभियान अब गांव-गांव और जनपद स्तर तक पहुंच रहा है। इसी क्रम में अमरोहा में नारी उत्कर्ष कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में संस्कारवान पीढ़ी के निर्माण, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने को लेकर व्यापक मंथन हुआ शांतिकुंज की अधिष्ठात्री श्रद्धेया शैलदीदी से आशीर्वाद तथा महिला मंडल की प्रमुख शैफाली पंड्या से मार्गदर्शन प्राप्त कर ब्रह्मवादिनी बहनों की टोली अमरोहा पहुंची। उनके संचालन में आयोजित नारी उत्कर्ष कार्यशाला का शुभारंभ शांतिकुंज प्रतिनिधियों और नगर पालिका परिषद अमरोहा की अध्यक्ष शशि जैन ने दीप प्रज्वलित कर किया।
कार्यशाला में शांतिकुंज टोली प्रमुख वर्षा ठाकुर ने गर्भोत्सव संस्कार और बच्चों में संस्कार निर्माण को लेकर वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा के विचारों को साझा किया। उन्होंने कहा कि बच्चे के व्यक्तित्व और भविष्य के निर्माण में परिवार की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। परिवार ही बच्चे की पहली पाठशाला है और मां इस पाठशाला की प्रमुख भूमिका निभाती हैं। माताएं बच्चों को अच्छे संस्कार देकर समाज और राष्ट्र के लिए जिम्मेदार नागरिक तैयार करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं। वक्ताओं ने कहा कि महिलाओं को केवल परिवार तक सीमित न रहकर समाज में जागरूकता फैलाने की जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए। शिक्षित और सशक्त महिलाएं सामाजिक बदलाव की मजबूत आधारशिला बन सकती हैं। कार्यशाला में महिलाओं से समाज में सकारात्मक सोच विकसित करने और नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने का आह्वान किया गया।
कार्यक्रम के दौरान दहेज प्रथा, नशाखोरी और प्रदूषण जैसी सामाजिक समस्याओं पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने दहेजमुक्त, नशामुक्त और प्रदूषणमुक्त समाज के निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही सामाजिक कुरीतियों को दूर करने के लिए परिवार, महिला मंडलों और सामाजिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी को जरूरी बताया गया। महिलाओं को इन समस्याओं के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाने और अपने आसपास सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए प्रेरित किया गया। शांतिकुंज टोली ने माता भगवती देवी शर्मा के जन्मशताब्दी वर्ष के तहत वर्ष 2027 तक चलने वाले विभिन्न कार्यक्रमों की रूपरेखा भी प्रस्तुत की। कार्यकर्ताओं को अभियान से जुड़ी जिम्मेदारियां निभाने और कार्यक्रमों को समाज के अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए प्रेरित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि जन्मशताब्दी वर्ष केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि समाज निर्माण के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने का अवसर है।
कार्यक्रम में सत्संकल्प पत्र का सामूहिक वाचन किया गया। इसके अलावा गीत, भजन और प्रज्ञा गीतों की प्रस्तुतियों ने वातावरण को आध्यात्मिक और प्रेरणादायी बना दिया। उपस्थित लोगों ने जन्मशताब्दी वर्ष के अंतर्गत चलाए जा रहे कार्यक्रमों को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने का संकल्प लिया। आयोजकों के अनुसार, अमरोहा में आयोजित इस सम्मेलन में करीब एक हजार भाई-बहनों ने भाग लिया। इनमें लगभग 800 महिलाएं शामिल रहीं। बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी को नारी जागरण अभियान के प्रति बढ़ती सामाजिक सहभागिता के रूप में देखा गया। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को जागरूक, सशक्त और सामाजिक परिवर्तन का सक्रिय माध्यम बनाना रहा। माता भगवती देवी शर्मा के जन्मशताब्दी वर्ष के अवसर पर शांतिकुंज की ओर से चलाया जा रहा यह अभियान संस्कारवान पीढ़ी के निर्माण और सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन का संदेश लेकर आगे बढ़ रहा है। अमरोहा की कार्यशाला में भी इसी संकल्प को मजबूत करते हुए महिलाओं और कार्यकर्ताओं ने समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए निरंतर प्रयास करने की प्रतिबद्धता जताई।






