उत्तरकाशी। रिपोर्ट -चंद्रप्रकाश बहुगुणा
चिन्यालीसौड़ के भल्डगांव में विस्थापन एवं पुनर्वास की मांग को लेकर ग्रामीणों का अनिश्चितकालीन धरना सोमवार को छठे दिन भी जारी रहा। ग्रामीणों का आरोप है कि लंबे समय से विस्थापन और पुनर्वास की समस्या झेलने के बावजूद शासन-प्रशासन की ओर से उनकी मांगों पर अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर लिखित और ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।भल्डगांव के ग्रामीण वर्षों से विस्थापन एवं पुनर्वास की समस्या को लेकर शासन और प्रशासन के समक्ष अपनी बात रखते आ रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक गांव की स्थिति को लेकर पूर्व में सर्वे, ड्रोन सर्वे और अन्य तकनीकी जांच भी कराई जा चुकी है। इसके बावजूद इन सर्वेक्षणों और तकनीकी जांच से जुड़ी रिपोर्ट अब तक ग्रामीणों के सामने सार्वजनिक नहीं की गई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें केवल आश्वासन देने के बजाय सरकार को अब स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए।
धरने पर बैठे ग्रामीणों ने मांग की कि भल्डगांव की विस्थापन एवं पुनर्वास संबंधी समस्या को शासन तत्काल गंभीरता से संज्ञान में ले। साथ ही अब तक कराए गए सभी सर्वे, ड्रोन सर्वे और तकनीकी जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, ताकि ग्रामीणों को वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सके। ग्रामीणों ने पुनर्वास की दिशा में समयबद्ध और ठोस कार्रवाई की भी मांग उठाई है। ग्रामीणों का कहना है कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक स्वार्थ से प्रेरित नहीं है। यह आंदोलन गांव के लोगों के अधिकार, सुरक्षा और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा हुआ है। उनका कहना है कि लंबे समय से समस्या का समाधान नहीं होने के कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से अपील की है कि वह धरना स्थल पर पहुंचकर उनकी समस्याएं सुने और बातचीत के माध्यम से समाधान की दिशा में आगे बढ़े। ग्रामीणों के मुताबिक अब केवल मौखिक आश्वासन से काम नहीं चलेगा। उन्हें भल्डगांव के विस्थापन एवं पुनर्वास को लेकर लिखित और स्पष्ट निर्णय चाहिए।
छठे दिन भी बड़ी संख्या में ग्रामीण धरने में शामिल रहे। आंदोलन में गोपीनाथ सिंह रावत, कमललाल, कमलूलाल, बसंतू लाल, गणेश नौटियाल, सुंदरमणि, विमला देवी, बैशाखी देवी, मटूड़ी देवी और रोशनी देवी सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे। ग्रामीणों ने दोहराया कि उनकी मांगों पर जब तक ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक अनिश्चितकालीन आंदोलन जारी रहेगा। अब देखना होगा कि शासन-प्रशासन ग्रामीणों की मांगों पर कब तक ठोस कदम उठाता है और पूर्व में कराए गए सर्वे एवं तकनीकी जांच की रिपोर्ट कब सार्वजनिक की जाती है।






