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सवायजपुर तहसील के 70 गांव व मजरों में संभवित बाढ़ से खतरा, 8933 परिवारों की 51,571 आबादी चिह्नित

 

रिपोर्ट-बी जी मिश्र

जन एक्सप्रेस /हरदोई :– बाढ़-कटान की आशंका को देखते हुए सवायजपुर तहसील प्रशासन ने प्रभावित होने वाले 70 गांवों व मजरों की सूची तैयार कराई है। तहसील प्रशासन की ओर से जारी आदेश में इन क्षेत्रों के 8,933 परिवारों की कुल 51,571 आबादी के प्रभावित होने का अनुमान है।एसडीएम शिवानी सिंह के निर्देश पर संबंधित राजस्व कर्मचारियों को मौके की सतत निगरानी करने और प्रभावित परिवारों का सत्यापन कर तीन दिन के भीतर आख्या तहसील आपदा कार्यालय में उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

जारी सूची के अनुसार बारामऊ, कुण्डपुरा, गढ़िया, खजुआपुर,टिलिया, धनुकाना, दुलारपुर, ढकपुरा, बदनापुर, दहेलिया, अहिरनपुरवा, चुपापुर, चमरौधा, जसापुरवा, सुलखामऊ, निकामदपुर, जीवनपुरवा, जवाहर पुरवा पूर्वी, जवाहर पुरवा पश्चिमी, किशनपुरवा, बेसहारा, पठाननपुरवा, ब्राह्मण पुरवा, बेहटालाखी, मुर्चा, मुचिया, भुलभुलियापुर, रामनगर, मुर्वा शाहबुद्दीनपुर, शाहबुद्दीनपुर, आलमपुर, आलमपुर मड़ैया, पियारीपुर, बेहटा मुड़िया और करनपुर को शामिल किया गया है।

इसके अलावा सूची में अलीशेरपुरवा, अदनिया, नाऊपुरवा, झड़ापुरवा, टिक्कापुरवा, जगन्नाथपुरवा, भट्टनपुरवा, सिसैयापुरवा, मझरिया, सुदनीपुर, गोंडा, बरगदापुरवा, गंगानगर, चन्दनपुर, दुलारपुर, शंकरपुरी, छंगापुरवा, शिब्बापुरवा, अंधेया, आशापुरवा, बाग पुरवा, खुर्रमपुरवा, खजुरिया पुरवा, पतारपुरवा, गुलाब पुरवा, तिवारी पुरवा, लालशाहपुरवा, बन्दीपुरवा, अर्जुनपुर,ज्ञानपुर, हेकड़गंज, प्रतिपालपुर, नोनखारा, नन्दना और बम्हरौली भी शामिल हैं।

आंकड़ों के अनुसार सबसे अधिक प्रभावित आबादी वाले क्षेत्रों में पठाननपुरवा में 750 परिवारों की 4,500 आबादी, बेहटालाखी में 300 परिवारों की 2,100 आबादी, बेहटा मुड़िया में 264 परिवारों की 2,690 आबादी, करनपुर में 269 परिवारों की 2,640 आबादी, अंधेया में 500 परिवारों की 1,200 आबादी तथा ज्ञानपुर में 300 परिवारों की 1,324 आबादी दर्ज है। चन्द्रमपुर में 300 परिवारों की 1,000 आबादी और प्रतिपालपुर में 300 परिवारों की 1,250 आबादी प्रभावित होने का अनुमान लगाया गया है।

प्रशासन ने संबंधित लेखपालों को निर्देशित किया है कि बाढ़ एवं कटान से प्रभावित होने वाले गांवों और उनके मजरों में परिवारों का सत्यापन कर वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट निर्धारित समय में उपलब्ध कराएं। इससे संभावित आपदा की स्थिति में प्रभावित लोगों के लिए राहत एवं बचाव की व्यवस्था समय से सुनिश्चित की जा सकेगी।

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