कागजों में 14 बाढ़ चौकियां और 48 शरणालय, मौके पर प्रभारी व कर्मचारी नदारद

रिपोर्ट-बी जी मिश्र
जन एक्सप्रेस /हरदोई :- गंगा और रामगंगा नदियों का जलस्तर बढ़ने के बीच बाढ़ से निपटने के प्रशासनिक दावों की जमीनी हकीकत सवाल खड़े कर रही है। तहसील क्षेत्र में कागजों पर 14 बाढ़ राहत चौकियां और 48 बाढ़ शरणालय चिन्हित किए गए हैं, लेकिन हालात यह हैं कि इन बाढ़ राहत चौकियों पर अभी तक न तो कोई प्रभारी तैनात नजर आ रहा है और न ही कर्मचारी मौजूद हैं। ऐसे में अचानक बाढ़ की स्थिति बनने पर राहत एवं बचाव व्यवस्था को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
तहसील प्रशासन सवायजपुर की सूची में राजकीय कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय पाली, प्राथमिक विद्यालय सैदापुर, तहसील सवायजपुर,प्राथमिक विद्यालय बरसोहिया,जूनियर हाईस्कूल अजतूपुर मजरा खसौरा,राममनोहर लोहिया इंटर कॉलेज हरपालपुर,महात्मा गांधी इंटर कॉलेज पलिया,प्रा.वि. बेड़ीजोर,राजकीय उ.मा विद्यालय अर्जुनपुर,प्रा. वि. दहेलिया,जेकेजे इंटर कॉलेज चौंसार, प्रा वि चाऊंपुर,बरौलिया धर्मशाला और जनता इंटर कॉलेज पुरसौली को बाढ़ चौकियों के रूप में चिन्हित किया गया है।
इसके अलावा बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित रखने के लिए 48 शरणालय भी चिह्नित किए गए हैं।क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों, इंटर कॉलेजों, स्वास्थ्य केंद्रों, धर्मशालाओं और अन्य भवनों को शरणालय के रूप में शामिल किया गया है।लेकिन यह सब व्यवस्थाएं केवल कागजो पर तैयार कर देने से बाढ़ राहत व्यवस्था पूरी नहीं हो जाती। चौकियों पर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की मौजूदगी जरूरी है, ताकि बाढ़ का पानी बढ़ने पर ग्रामीणों को समय रहते सूचना दी जा सके और उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा सके।
गंगा और रामगंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी के दौरान नदी किनारे बसे गांवों के लोगों में पहले से ही चिंता बनी रहती है। ऐसे में बाढ़ राहत चौकियों पर जिम्मेदार कर्मचारियों की गैरमौजूदगी से ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। यदि किसी गांव में अचानक पानी पहुंचता है तो तत्काल सूचना देने, लोगों को सुरक्षित निकालने, नाव अथवा अन्य राहत साधनों की व्यवस्था कराने और जरूरतमंदों तक भोजन व अन्य सामग्री पहुंचाने की जिम्मेदारी आखिर कौन संभालेगा, यह बड़ा सवाल है।
प्रशासन ने भले ही 14 बाढ़ चौकियां और 48 बाढ़ शरणालय चिन्हित कर लिए हों, लेकिन जब तक चौकियों पर प्रभारी और कर्मचारी तैनात नहीं होते, तब तक यह व्यवस्था कागजी ही नजर आती है। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ का पानी आने के बाद इंतजाम करने के बजाय प्रशासन को पहले से ही चौकियों पर कर्मचारियों की तैनाती कर निगरानी व्यवस्था सक्रिय करनी चाहिए।
ऐसे में सवाल यह है कि बाढ़ का पानी बढ़ने पर अगर राहत चौकियों पर ही जिम्मेदार लोग मौजूद नहीं होंगे तो प्रभावित ग्रामीणों तक समय पर राहत और बचाव कैसे पहुंचेगा?






