सांसद रमेश अवस्थी के साथ मुख्य आरोपी का फोटो हुआ वायरल

अमन तिवारी की रिपोर्ट
जन एक्सप्रेस/ कानपुर: नगर निगम की तरफ से दर्ज एफआईआर के बाद से ही मुख्य आरोपी गोविंद शर्मा फरार है। उसके पॉलिटिकल कनेक्शन होने की वजह से शायद पुलिस उसपर हाथ नहीं डाल पा रही है। नगर निगम घोटाले का मुख्य सूत्रधार गोविंद शर्मा का एक फोटो सोशल मीडिया पर बहुत तेजी से वायरल हो रहा है। जिसमे वो कानपुर के सांसद रमेश अवस्थी के कंधे पर हाथ रखकर खड़ा दिखाई दे रहा है। जिससे ये माना जा रहा है की करोड़ो के घोटालेबाज गोविन्द शर्मा और सांसद रमेश अवस्थी के सम्बन्ध बहुत ही घनिष्ठ हैँ। आपका अपना अखबार जनएक्सप्रेस वायरल तस्वीर की पुष्ठी नहीं करता है। जनएक्सप्रेस सूत्रों की माने तो जिस दिन गोविंद शर्मा पर एफआईआर दर्ज हुई है,उससे महज दो या तीन दिन पहले ही गोविंद शर्मा और सांसद रमेश अवस्थी आगरा से कानपुर स्थित घर साथ मे ही आये हैं। और फूल -मलाओ से स्वागत करने के साथ ही कंधे पर हाथ रखकर फोटो भी खिंचवाई। अब मुकदमा दर्ज होने के बाद से गोविंद फरार है,और शहर के सबसे ताकतवर नेता माने जाने वाले सांसद रमेश अवस्थी के साथ गोविंद की वायरल तस्वीर खुद मे बहुत कुछ बयान कर रही है।
बगल मे छोरा और कई प्रदेशों मे ढिंढोरा
सांसद रमेश के साथ आरोपी का कथित फोटो वायरल होने के बाद ये कयास लगाए जा रहे हैं, जिस गोविंद शर्मा को कानपुर नगर की हाईटेक पुलिस राजस्थान और मध्य प्रदेश मे तलाश कर रही हैं। कहीं वो कानपुर या आसपास के इलाके मे छिपकर फरारी तो नहीं काट रहा है। गोविंद शर्मा शातिर है, कहीं ऐसा तो नहीं की वो अपने किसी गुर्गे से मोबाइल की लोकेशन राजस्थान और मध्यप्रदेश मे दिखाकर पुलिस को गुमराह कर रहा है। गोविंद शर्मा का गहरा नाता आगरा और कानपुर से ही रहा है,जिसकी वजह से उसके काफी बड़े लोगो से सम्बन्ध हैं। ऐसे मे उसके लिए कानपुर या आसपास के इलाकों मे फरारी काटना बेहद आसान है।
बड़ा सवाल ये है की आखिर पुलिस ऐसे लोगो तक पहुंचेगी कैसी जिनके संरक्षण मे गोविन्द फरारी काट रहा है।

नगर निगम के बड़े अधिकारियो तक जांच की आंच क्यों नहीं
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की गोपनीय जांच मे नगर निगम कानपुर की पोल खुल गयी है। मुख्यमंत्री की फटकार के बाद आनन- फानन मे 100 करोड़ के टेंडर तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिए। लेकिन क्या इस बात से इंकार किया जा सकता है की गोविंद शर्मा जिस लाटरी सिस्टम के जरिये 85% प्रतिशत तक डाउन टेंडर मैनेज करता था, और इसकी भनक तक नगर निगम के अधिकारियो को ना लगती हो। आखिर नगर निगम के बड़े अधिकारी जांच की राडार पर क्यों नहीं आ रहे। हर बार की तरह छोटे कर्मचारियों को ही बली का बकरा बनाया जा रहा है। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता की वो आरोपी नहीं हैं,लेकिन किसी बड़े अधिकारी से सेटिंग के बिना इतना बड़ा खेल कैसे हो सकता है।
अगर पुलिस का दबाव पड़ा तो कोर्ट मे आत्मसमर्पण कर सकता है आरोपी
मुख्यमंत्री के सख्त रवैये के बाद कानपुर पुलिस एक्शन मोड मे है। तत्काल प्रभाव से दो आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद जेल भेज दिया गया है, और उसके बाद प्रेस वार्ता कर फरार गोविंद शर्मा और उसके साथी की जानकारी खुद पुलिस कमिश्नर ने अपने दोनों हाथो मे आरोपियों की फोटो लेकर मीडिया के सामने पेश की। ऐसे मे लग रहा है कानपुर पुलिस आरोपियों तक पहुँचने मे कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है। इसलिए कई टीमें बनाकर फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है। दिन रात संभावित स्थानों पर दबिश देकर आरोपियों की तलाश की जा रही है। ऐसे मे अगर पुलिस का दबाव बढ़ा तो गोविंद शर्मा के सारे दाँव पेंच फेल हो जायेंगे और उसको कानून के सामने आत्मसमर्पण करना पड़ेगा। हालाँकि कानपुर पुलिस किरकिरी होने से पहले गोविंद को पहले ही दबोचना चाहती है।






