
जन एक्सप्रेस / हरिद्वार: देव संस्कृति विश्वविद्यालय आज शिक्षा, संस्कृति, शोध और व्यक्तित्व निर्माण के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर चुका है। देवभूमि उत्तराखंड में स्थित यह विश्वविद्यालय राज्य गठन के बाद स्थापित हुआ और वर्षों से शिक्षा, सामाजिक चेतना तथा सांस्कृतिक मूल्यों के संवर्धन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. प्रणव पण्ड्या के मार्गदर्शन में संस्थान ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत की है। इसी कारण देश-विदेश के हजारों विद्यार्थी यहां अध्ययन और शोध के लिए आकर्षित हो रहे हैं।
शिक्षा के साथ व्यक्तित्व और चरित्र निर्माण पर जोर
विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, चरित्र और कौशल का समग्र विकास करना है। युवा प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या के अनुसार आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का समन्वय ही विश्वविद्यालय की प्रमुख विशेषता है।
यहां विद्यार्थियों को विषयगत ज्ञान के साथ जीवन मूल्यों, आत्मानुशासन, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक उत्तरदायित्व की शिक्षा भी प्रदान की जाती है।
भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शोध का समन्वय
विश्वविद्यालय में आधुनिक तकनीक और शोधपरक दृष्टिकोण के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा को समृद्ध करने के प्रयास किए जा रहे हैं। विद्यार्थियों के लिए नियमित रूप से गीता अध्ययन, ध्यान-साधना, योग तथा जीवन प्रबंधन से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
इन गतिविधियों का उद्देश्य युवाओं को मानसिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाना है, ताकि वे समाज और राष्ट्र निर्माण में सकारात्मक भूमिका निभा सकें।
28 देशों के संस्थानों से शैक्षणिक सहयोग
देव संस्कृति विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय पहचान लगातार बढ़ रही है। विश्वविद्यालय भारत सहित 28 देशों के अनेक शैक्षणिक एवं शोध संस्थानों के साथ सहयोग स्थापित कर चुका है। इन साझेदारियों के माध्यम से विद्यार्थियों और शोधार्थियों को वैश्विक स्तर पर अध्ययन, अनुसंधान और नवाचार के अवसर प्राप्त होते हैं।
विश्वविद्यालय समय-समय पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों, शोध परियोजनाओं, छात्र एवं शिक्षक विनिमय कार्यक्रमों का भी आयोजन करता है।
विशेष शोध एवं अध्ययन केंद्र
विश्वविद्यालय में कई विशिष्ट केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें:
- दक्षिण एशियाई शांति एवं सामंजस्य संस्थान
- बाल्टिक संस्कृति एवं अध्ययन केंद्र
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं अनुसंधान केंद्र
प्रमुख हैं। ये संस्थान शांति अध्ययन, सांस्कृतिक संवाद, तकनीकी नवाचार और वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देने का कार्य कर रहे हैं।
विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश जारी
विश्वविद्यालय में एमबीए सहित अनेक स्नातक, स्नातकोत्तर और डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। कंप्यूटर विज्ञान, पर्यटन प्रबंधन, पत्रकारिता एवं जनसंचार, योग विज्ञान, भारतीय शास्त्रीय संगीत, संस्कृत, हिंदी तथा इतिहास एवं भारतीय संस्कृति जैसे विषयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है।
25 जून तक आवेदन का अवसर
शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार आवेदन की अंतिम तिथि 25 जून निर्धारित की गई है। नए सत्र का शुभारंभ 27 जुलाई को आयोजित होने वाले ज्ञान दीक्षा समारोह के साथ किया जाएगा।
विश्वविद्यालय का मानना है कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि उत्कृष्ट व्यक्तित्व, सामाजिक चेतना और बेहतर समाज का निर्माण करना है। इसी दृष्टि के साथ देव संस्कृति विश्वविद्यालय ज्ञान, संस्कार, सेवा और आत्मनिर्माण के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ रहा है।

