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यूपी पुलिस की वसूली आखिर कब चढ़ेगी ‘सूली’

सीतापुर में घूस देने की जगह मौत को गले लगाने वाले दरोगा ने प्रदेश के पुलिस महकमे में भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों को खोद दिया है

  • सवाल उठता है क्या मुट्ठी भर आरोपी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई से प्रदेश में खाकी पर लगे भ्रष्टाचार के दाग धुल जाएंगे?
  • – क्या मोटी उगाही कर मिल बांटकर खाने का सिलसिला बंद हो जाएगा?
  • – आखिर कब और कैसे पुलिस द्वारा वास्तव में पीड़ितों को न्याय मिलेगा?

जन एक्सप्रेस/डॉ. वैभव शर्मा

लखनऊ। सीतापुर में पुलिस के अपने वरिष्ठ अधिकारी को कथित तौर पर घूस का चढ़ावा देने की जगह मौत को गले लगाने वाले दरोगा ने प्रदेश के पुलिस महकमे में भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों को खोद दिया है। बचाव की मुद्रा में आए पुलिस अफसर ने मुट्ठी भर आरोपी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की संस्तुति भी कर दी है। सवाल उठता है कि क्या इतने भर से प्रदेश में खाकी पर लगे भ्रष्टाचार के दाग धुल जाएंगे। क्या मोटी उगाही कर मिल बांटकर खाने का सिलसिला बंद हो जाएगा। क्या पुलिस द्वारा वास्तव में पीड़ितों को न्याय मिलेगा। जब तक यूपी पुलिस की पूरी कार्यप्रणाली में बदलाव नहीं होगा उत्पीड़न का सिलसिला यूं ही चलता रहेगा। ईमानदार पुलिसकर्मी या तो विभाग में किनारे लगे रहेंगे, तंग आकर नौकरी छोड़ देंगे या मजबूरन आत्मघाती कदम उठाएंगे।
मूलरूप से फतेहपुर के थाना कल्याणपुर के जलाला गांव निवासी मनोज कुमार मछरेहटा थाने में तैनात थे। शुक्रवार सुबह 10.15 बजे थाना परिसर में मुख्य भवन के पीछे गोली चलने की आवाज आई। पुलिसकर्मी
वहां पहुंचे तो देखा दरोगा मनोज कुमार ने खुद को सर्विस रिवॉल्वर से गोली मार ली थी। मौके पर मिले सुसाइड नोट में दरोगा ने थानाध्यक्ष पर उगाही के लिए परेशान करने, विवेचना में रुपये मांगने के साथ साथी पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
दरोगा की पत्नी ने इसे हत्या बताया है तो एसपी ने मौत का कारण स्पष्ट नहीं होने और जांच के लिए टीमें गठित किए जाने की बात कही है। एसपी ने एसओ समेत पांच आरोपित पुलिसकर्मियों को निलंबित करने की संस्तुति चुनाव आयोग से की है।

थाना-चौकी ठेके पर बिकना कब बंद होंगे

सीतापुर में दरोगा द्वारा आत्महत्या एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है आखिर प्रदेश में थाना चौकी ठेके पर बिकना कब बंद होंगे। पुलिस विभाग के सूत्रों के अनुसार महीने की कमाई के हिसाब से आज भी प्रदेश में थाने और चौकी का ठेका होता है। आला अधिकारियों को तय रकम हर महीने पहुंचाई जाती है। थाना या चौकी जितना मलाईदार होता है उसी हिसाब से महीने के ठेके गिरगांव तय की जाती है। टारगेट को पूरा करने या उससे अधिक उगाही करने के लिए संबंधित थानाध्यक्ष पूरे स्टाफ पर दबाव बनाते हैं। घूस की रकम का रैंक के हिसाब से बंदर बांट किया जाता है।

घूस न देने पर प्रताड़ित होते हैं फरियादी और ईमानदार पुलिसकर्मी

यही कारण है कि हर तफ्तीश पर भ्रष्ट पुलिस वाले मोटी उगाही करते हैं। पीड़ित की सुनवाई करने की एवज में उसे मोटी रकम वसूलते हैं। यही नहीं, ईमानदार पुलिसकर्मियों को भी दबाव में लेकर वसूली करने के लिए कहते हैं। जो भी पीड़ित और पुलिसकर्मी नाजायज पैसा देने से मना करते हैं उन्हें सार्वजनिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है।

लगातार बढ़ता जा रहा है घूस का रेट

घूस लेने वाले पुलिसकर्मी ताल ठोक कर कहते हैं जहां मन में आए वहां जाकर शिकायत करो। हर कुर्सी पर चढ़ावा जाता है। यह सुनकर पीड़ित और ईमानदार पुलिसकर्मी घबरा जाते हैं। ना चाहते हुए उन्हें भी भ्रष्ट तंत्र करने निवाला बनना पड़ता है। भ्रष्ट पुलिसकर्मी अपनी जेब अधिक से अधिक भरने के लिए मुंह खोलकर घूस मांगते हैं। यही कारण है कि घूस का रेट बढ़ता जा रहा है।

सीएम योगी की ईमानदार छवि को भी भुना रहे

सूत्रों के अनुसार पुलिस विभाग ही नहीं अन्य सरकारी विभागों में भी रिश्वतखोरी का रेट काफी बढ़ गया है। पहले जो काम ₹500 का चढ़ावा देकर हो जाया करता था उसके लिए अब ₹5000 तक अदा करने पड़ रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी की ईमानदार छवि पर बट्टा लगाते हुए पुलिसकर्मी और अधिकारी यह एहसान भी जताते हैं कि किसी कीमत पर अमुख काम संभव नहीं है। कुर्सी खतरे में डालकर जैसे-जैसे आपके लिए यह काम कर रहे हैं। यह भी कहने से नहीं चूकते इस हिसाब से घूस बहुत कम है।

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