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35 करोड़ पौधों के रिकॉर्ड के बाद योगी सरकार का नया अभियान, जानें कब और कहां होंगे विशेष पौधारोपण कार्यक्रम

जन एक्सप्रेस /लखनऊ :- एक दिन में 35 करोड़ से अधिक पौधे लगाकर कीर्तिमान स्थापित करने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार अब पौधारोपण अभियान को सामाजिक और सांस्कृतिक सरोकारों से जोड़ने जा रही है। सरकार का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि जनभागीदारी बढ़ाकर पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देना है।

वन विभाग की कार्ययोजना के अनुसार जुलाई से सितंबर तक विभिन्न विशेष अवसरों पर अलग-अलग थीम आधारित पौधारोपण अभियान आयोजित किए जाएंगे। इन अभियानों में महिलाओं, विद्यार्थियों, शिक्षकों, किसानों, स्वयंसेवी संस्थाओं और सामाजिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

जुलाई से सितंबर तक होंगे विशेष अभियान

वन विभाग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार विभिन्न तिथियों पर अलग-अलग विषयों पर पौधारोपण अभियान चलाए जाएंगे।

पौधारोपण कार्यक्रमों का कैलेंडर

तिथि अभियान
18 जुलाई समृद्धि वन
21 जुलाई कृषि वन
23 जुलाई ऊर्जा वन
27 जुलाई समरस वन
15 अगस्त वंदे मातरम् वाटिका
28 अगस्त (रक्षाबंधन) भाई-बहन पौधारोपण
5 सितंबर (शिक्षक दिवस) एक पेड़ गुरु के नाम

पर्यावरण संरक्षण के साथ किसानों को भी मिलेगा लाभ

इन अभियानों के माध्यम से कृषि वानिकी को बढ़ावा देने, औषधीय एवं उपयोगी पौधों के संरक्षण और ऊर्जा के लिए उपयुक्त प्रजातियों के रोपण का संदेश दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने और प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

समाज की भागीदारी पर रहेगा विशेष जोर

प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं विभागाध्यक्ष सुनील चौधरी ने बताया कि इन अभियानों का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि समाज को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। सभी कार्यक्रम प्रदेश के वन प्रभागों, विकास खंडों, नगरीय निकायों और संबंधित संस्थाओं के सहयोग से आयोजित किए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि जब पौधारोपण को सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक भावनाओं से जोड़ा जाएगा, तब लोग पौधों के संरक्षण की जिम्मेदारी भी स्वयं निभाएंगे।

हर पौधा बनेगा सामाजिक जिम्मेदारी का प्रतीक

वन विभाग के अनुसार प्रत्येक अभियान को किसी विशेष अवसर और सामाजिक संदेश से जोड़ा गया है। इससे लगाया गया प्रत्येक पौधा केवल हरियाली का प्रतीक नहीं रहेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और समाज की साझी जिम्मेदारी का संदेश भी देगा।

सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से प्रदेश में हरित क्षेत्र बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों की भागीदारी भी मजबूत होगी।

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