
जिला संवाददाता – सीपी बहुगुणा
जन एक्सप्रेस / हरिद्वार: गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में देश के विभिन्न राज्यों से आए साधक इन दिनों साधना शिविर में आत्म साधना एवं आत्मपरिष्कार के क्रम में जुटे हैं। नियमित रूप से गायत्री महामंत्र का जप करने वाले इन साधकों ने ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ की भावना के साथ यज्ञ, ध्यान और साधना में सहभागिता की।
सावन के पवित्र माह में 400 से अधिक साधकों ने देवसंस्कृति विश्वविद्यालय परिसर स्थित प्रज्ञेश्वर महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना की। सभी श्रद्धालु साधकों ने भगवान शिव से विश्व में शांति, सद्भाव और सभी के कल्याण की प्रार्थना की। इस अवसर पर उन्होंने सामूहिक रूप से अपने जीवन में सद्विचार, सद्भावना और सेवा भाव को बढ़ाने का संकल्प भी लिया। वहीं साधकों ने देवसंस्कृति विश्वविद्यालय का भ्रमण भी किया। उन्होंने विवि के विभिन्न शैक्षणिक, सांस्कृतिक, सामाजिक एवं रचनात्मक प्रकल्पों की जानकारी ली। विश्वविद्यालय के वातावरण, विद्यार्थियों की गतिविधियों और संस्कारपरक शिक्षा व्यवस्था को देखकर साधक अभिभूत हुए।
इस दौरान साधकों ने देसंविवि के उपाध्यक्ष डॉ. चिन्मय पण्ड्या से भेंट कर साधना संबंधी मार्गदर्शन प्राप्त किया। डॉ. पण्ड्या ने कहा कि साधना का वास्तविक उद्देश्य व्यक्ति के अंतर्मन का परिष्कार कर उसे लोकमंगल के लिए तैयार करना है। गायत्री महामंत्र का नियमित जप विचारों में पवित्रता और जीवन में सकारात्मकता लाता है। सावन का समय आत्मशोधन, साधना और संकल्प का विशेष अवसर है। उन्होंने साधकों से अपनी साधना को सेवा और समाज निर्माण से जोड़ने का आह्वान किया।
शिविर में आये उत्तराखण्ड, बिहार, आदि राज्यों से आये साधकों ने कहा कि शांतिकुंज का आध्यात्मिक वातावरण उन्हें साधना, सेवा और संस्कार के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।






