स्कूल छुट्टी के समय जौनपुर की सड़कें बनीं पार्किंग स्थल
बसों के रैले और अव्यवस्थित ट्रैफिक ने शहर को रोज़ाना दो–तीन घंटे जाम में झोंका

जन एक्सप्रेस/ जौनपुर: जौनपुर जनपद मुख्यालय में इन दिनों यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई नजर आ रही है। खासकर स्कूल और कॉलेजों की छुट्टी के समय शहर की प्रमुख सड़कें मानो पार्किंग स्थल में तब्दील हो जाती हैं। हालात इतने खराब हो जाते हैं कि आम नागरिकों को रोज़ाना दो से तीन घंटे तक जाम में फंसे रहना पड़ता है।
शहर के अधिकांश निजी स्कूलों द्वारा बच्चों के आवागमन के लिए 32 से 50 सीटर बड़ी बसों का संचालन किया जा रहा है। जैसे ही एक ही समय पर सैकड़ों की संख्या में ये स्कूल बसें शहर के चारों दिशाओं से मुख्य मार्गों पर प्रवेश करती हैं, पूरा ट्रैफिक सिस्टम ध्वस्त हो जाता है। बसों के रैले के कारण सड़कें संकरी पड़ जाती हैं और वाहन रेंगते हुए नजर आते हैं।
स्थिति उस समय और भयावह हो जाती है, जब आगे निकलने की होड़ में ऑटो रिक्शा, टू-व्हीलर और अन्य छोटे वाहन आपस में उलझ जाते हैं। कई बार मामूली टक्कर के बाद विवाद और मारपीट तक की नौबत आ जाती है। ऐसा ही एक मामला आज देखने को मिला, जब टू-व्हीलर सवार जावेद अहमद बस की चपेट में आने से बाल-बाल बचे। उन्होंने बताया कि यातायात व्यवस्था बेहद खराब है और थोड़ी सी चूक किसी की जान ले सकती है।
स्कूल बसें बच्चों को उतारते समय मुख्य सड़कों पर ही रुक जाती हैं, जिससे पीछे वाहनों की लंबी कतार लग जाती है। परिणामस्वरूप शहर के प्रमुख चौराहों और मार्गों पर जाम की स्थिति बन जाती है और पूरा जौनपुर घंटों तक जाम में कराहता रहता है। इस जाम का सबसे अधिक असर आम नागरिकों, मरीजों, व्यापारियों, विद्यार्थियों और कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों पर पड़ता है।
सुबह के समय भी हालात इससे बेहतर नहीं हैं। अभिभावक अपने बच्चों को टू-व्हीलर, फोर-व्हीलर, बैटरी रिक्शा और ऑटो के माध्यम से स्कूल-कॉलेज छोड़ने निकलते हैं। इसी दौरान भारी वाहन, माल ढोने वाले ट्रक और अन्य बड़ी गाड़ियां भी शहर के भीतर प्रवेश कर जाती हैं, जिससे ट्रैफिक का दबाव कई गुना बढ़ जाता है।
चिंताजनक बात यह है कि सुबह के समय शहर में यातायात पुलिस की प्रभावी मौजूदगी लगभग न के बराबर रहती है। केवल सेंट पैट्रिक स्कूल के पास ही कभी-कभार पुलिस की तैनाती देखी जाती है, जबकि अन्य प्रमुख चौराहों और व्यस्त मार्गों पर यातायात पूरी तरह भगवान भरोसे चलता है। ट्रैफिक सिग्नल और पुलिस नियंत्रण के अभाव में वाहन चालक मनमाने ढंग से गाड़ियां चलाते नजर आते हैं।
स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों का कहना है कि यदि प्रशासन ठोस कदम उठाए तो इस समस्या से काफी हद तक राहत मिल सकती है। लोगों का सुझाव है कि स्कूलों की छुट्टी का समय चरणबद्ध (स्टैगर टाइमिंग) किया जाए, ताकि एक साथ सभी बसें सड़कों पर न उतरें। साथ ही भारी वाहनों के शहर में प्रवेश पर समयबद्ध रोक लगाई जाए और प्रमुख चौराहों पर यातायात पुलिस की स्थायी तैनाती सुनिश्चित की जाए।
जनता का यह भी कहना है कि स्कूल प्रबंधन को निर्देश दिए जाएं कि बसें मुख्य सड़कों पर खड़ी न हों और बच्चों को सुरक्षित स्थानों पर उतारा जाए। इसके अलावा ऑटो और ई-रिक्शा के लिए निर्धारित स्टैंड बनाए जाएं, ताकि वे बीच सड़क पर रुककर जाम न बढ़ाएं।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन और यातायात विभाग इस रोज़मर्रा की समस्या पर गंभीरता से ध्यान देगा, या जौनपुर की जनता यूं ही हर दिन जाम में फंसकर अपना कीमती समय, ऊर्जा और धैर्य गंवाती रहेगी। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या भविष्य में और विकराल रूप ले सकती है।






