utrakhandउत्तरकाशी

15 अगस्त पर सवाल आजादी के 80 साल बाद भी डंडी-कंडी पर ढोकर अस्पताल पहुंच रहे पहाड़ के लोग

  चंद्रप्रकाश बहुगुणा

जन एक्सप्रेस /उत्तरकाशी :- कल देश 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाएगा, लेकिन मोरी विकासखंड के सीमांत गांव फिताड़ी मे आजादी का मतलब अब भी डंडी-कंडी है। आज शुक्रवार सुबह 24 वर्षीय अनुरोध राणा पुत्र सिलदार सिंह बगीचे की ओर जा रहे थे कि बोसनी तोक मे भालू ने हमला कर दिया। वह गंभीर घायल हो गए। सूचना पर ग्रामीण पहुंचे, पर अस्पताल ले जाने का रास्ता सड़क मार्ग कुछ दिनों से बंद पड़ा है। लिहाजा घायल युवक को कंधों पर डंडी-कंडी में लादकर कई किलोमीटर पैदल ले जाना पड़ा। ग्राम प्रधान कृष्णा राणा का कहना है कि कही बार कई दिनों तक सड़क बंद होने से आपात समय मे बहुत बार जान जोखिम मे डालनी पड़ती है। यह सिर्फ एक हमले की कहानी नहीं है। यह आजादी के बाद भी पहाड़ में विकास के न पहुंचने की गवाही है। करोड़ों का बजट, योजनाएं, घोषणाएं सब कागजों में हैं, धरातल पर न सड़क, न समय पर अस्पताल, न वन्य जीवों से सुरक्षा। भालू के हमले के बाद ग्रामीणों में दहशत है और उनकी मांग है कि वन विभाग क्षेत्र में गश्त बढ़ाए और सुरक्षा के ठोस कदम उठाए। साथ ही घायल अनुरोध राणा को तत्काल इलाज और उचित मुआवजा मिले।
सवाल सीधा है 80 साल में अगर एक सीमांत गांव तक पक्की सड़क और प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा नहीं पहुंच सकी तो जिम्मेदार कौन है। विकास में रोड़ा बनने वाले अधिकारियों और लापरवाह तंत्र के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। जंगलात विभाग, लोक निर्माण और जिला प्रशासन को अब जवाब देना होगा कि पहाड़ का नागरिक संकट में कंधे का मोहताज क्यों है।15 अगस्त पर यह खबर सिर्फ सूचना नहीं, आईना है। तिरंगा लहराने के साथ हमें यह भी तय करना होगा कि अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक सड़क, स्वास्थ्य और सुरक्षा पहुंचे। नहीं तो स्वतंत्रता दिवस की शपथे अधूरी रह जाएंगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button