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आजमगढ़ में विश्व रंगमंच दिवस पर ‘स्वप्न में मुस्कुराना’ नाटक का मंचन

जन एक्सप्रेस/आजमगढ़: आजमगढ़ में विश्व रंगमंच दिवस के अवसर पर सूत्रधार संस्थान आजमगढ़ द्वारा कविताओं पर आधारित नवीनतम नाट्य प्रस्तुति ‘ स्वप्न मे मुस्कुराना’ का मंचन किया गया. इस प्रयोगधर्मी प्रस्तुति का सफल निर्देशन ख्यातिलब्ध निर्देशक अभिषेक पंडित ने किया। नाटक की शुरुआत सूत्रधार (अनादि अभिषेक) के मंच पर आगमन से होता है फिर क्रमशः अभिनेताओं द्वारा भिन्न- भिन्न कवियों की कविताओं के साथ अपने शारीरिक गति और लय के माध्यम से कविताओं को सजीव दृश्य मे बदलते हुए, इन कविताओं मे निहित सूक्ष्म प्रतिकों और उसके विम्बो को दृश्य मे ढाला गया। मंच पर इस तरह की प्रस्तुति ने दर्शकों को चमत्कृत किया।

सबसे पहले सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज की कविता मैने उससे कहा क्या तुम्हारे पास चाभी है मेरी, अशोक वर्मा की कविता प्रेम बहुत उथला भी है घुटनों नहीं जांघों तक,*सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की कविता तुम्हारे साथ रहकर अक्सर मुझे ऐसा महसूस हुआ, बृजेश यादव की कविता तुम्हारा जाना, और जारी है धर्मयुद्ध, और अंतिम कविता पराग पावन की पंजे भर ज़मीन को युवा अभिनेताओ द्वारा एक स्वप्निल संसार मे परिवर्तित किया गया। जहाँ प्रेम अपने कई मायनो और सन्दर्भ मे उभरती है, और यथार्थ के विदरूपताओं को भी रेखंकित कर जाती हैँ। निर्देशक की कल्पनाशील मंचिय युक्तियाँ, जिसमे कुछ मुखोटे कुछ लकड़ी के फ्रेम, कुछ पटके कुछ गुब्बारे वस्तु भर नहीं रह जाते बल्कि अंतर्मन की परतों को उभारने मे सहायक सिद्ध होते हैँ।

मंच पर युवा अभिनेता दल (नेहा रिद्धि मित्रा, शिवा यादव, राहुल यादव, सत्यम कुमार, पुलकित टिबडेवाल, हर्ष मौर्या के समूह की ऊर्जा, उनके शरीर की गति,लय प्रस्तुति के विषय वस्तु को उकरते हैँ। इन युवा अभिनेताओं ने अपने अभिनय कौशल से दर्शकों को तालियाँ बटोरी। यह प्रस्तुति युद्ध के विरुद्ध प्रेम को एक हथियार की तरह देख पाने मे सफल होती हैँ। इस प्रस्तुति को सफल बनाने मे अनादि अभिषेक का संगीत, सूरज सहगल का मंच विनन्यास, ममता पंडित का वस्त्र परिकल्पना, हरिकेश मौर्य की बेहतरीन प्रकाश परिकल्पना का योगदान महत्वपूर्ण रूप से उल्लेख करने योग्य हैँ। मंच व्यवस्था विवेक पाण्डेय और विनीत कुमार ने परिकल्पत किया जो की इस काव्य प्रस्तुति के अनुरूप रही। सहायक निर्देशक के रूप आदित्य अभिषेक और अरविन्द पाण्डेय ने योगदान दिया। संचालन अंगद कश्यप ने किया. प्रस्तुति व्यवस्थापक सूरज नाथ यादव रहे. मंचन पूर्व*सूत्रधार संस्थान के अध्यक्ष डॉo सी के त्यागी एवं उपस्थित गणमान्य अतिथियों के द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर नाटक का शुभारंभ किया गया।

 

 

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