आरटीओ में कब खत्म होगा ‘दलाल राज’?

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जन एक्सप्रेस/वरिष्ठ संवाददाता
कानपुर नगर। संभागीय परिवहन विभाग यानी चिरपरिचित नाम आरटीओ ऑफिस में बिना बिचौलियों और दलालों के आसानी से काम हो जाए अगर आप खुद का लाइसेंस बनवाने आएंगे तो कागजों में तमाम खामियां निकाली जाएंगी जिससे आप खुद में परेशान होकर दलाल के पास भागेंगे। दलालों के हर काम के लिए अलग सेवा शुल्क है। लर्निंग लाइसेंस से लेकर परमानेंट लाइसेन्स कराने का पैकेज है, गाड़ी की फिटनेस में बड़ा खेल चलता है। दलालों के इस खेल में कार्यालय के बाबू और अधिकारी भी लिप्त है क्योकि उनको शाम को मोटी रकम जो मिलती है। दलालों द्वारा दिए लाइसेन्स के कागजों में उनका कोड लिखा रहता है जिसे विंडो पर बैठा बाबू नोट कर लेता है फिर उसको एक कागज पर दलाल का नाम लिख कर वन प्लस वन लिख कर शाम को हिसाब किताब किया जाता है। गाडिय़ों के परमिट और फिटनेस में भी बड़ा खेल चलता है, गाड़ी फिटनेस के लिए पहुंचती जरूर है लेकिन जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति की जाती है जिस गाड़ी मालिक से सुविधा शुल्क मिल गया तो समझिये उसकी गाड़ी ऐसी जैसे शोरूम से अभी निकली हो।
अब मिलते हैं आरआई साहब अजीत सिंह से, साहब अपनी कुर्सी पर बैठ कर केवल दलालों की शक्ल देखकर कागजों पर साइन करते हैं। अब दलाल तीन फॉर्म लाए या चार इससे उनका ही फायदा है। वहीं आम आदमी अगर दो फॉर्म भी लेकर आए तो उसको डपट कर भगा दिया जाता है। आरआई साहब के कमरे में रखे कंप्यूटर पर होने वाले टैस्ट भी दिखावा मात्र है क्योंकि हकीकत देखने के बाद पता चला कि जिसको पास होना होता है वही पास होता है नहीं तो फेल होने पर दोबारा फीस जमाकर टैस्ट देना होता है अगर आपको एक बार में लाइसेन्स बनवाने की परीक्षा पास करनी है तो आपको अधिकारियों की स्वार्थपूर्ति करनी पड़ेगी अन्यथा आप फेल हो सकते हंै। डीएम साहब आपके एक दिन के निरीक्षण से इनपर कोई फर्क नहीं पडऩे वाला, दिन के एक घंटे में होने वाला आपका निरिक्षण इन दलालो के लिए लंच ब्रेक जैसा साबित होता है आपके निकलने के बाद ये फिर से सक्रीय हो जाते है जो लगातार और बदस्तूर जारी रहता है।


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