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राजस्थान हाईकोर्ट : निजी बीमा कंपनी की ओर से दायर दो रिट याचिकाएं खारिज

जोधपुर । राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश डॉ पुष्पेंद्र सिंह भाटी ने निजी बीमा कंपनी की ओर से दायर दो रिट याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि स्थाई लोक अदालत जोधपुर महानगर ने उनके दो साल बाद दायर प्रारंभिक आपत्ति के प्रार्थना पत्र को खारिज कर कुछ भी गलत नहीं किया है।

बजाज आलियांज लाइफ इंश्योरेंस कंपनी ने दो रिट याचिकाएं दायर कर कहा कि राजस्थान मरुधरा ग्रामीण बैंक ने उनके खिलाफ स्थाई लोक अदालत में जो प्रार्थना पत्र पेश किए हैं,उसकी सुनवाई का क्षेत्राधिकार स्थाई लोक अदालत को नहीं है,क्योंकि समझौते में मध्यस्थ का प्रावधान है और यह एक व्यावसायिक संविदा और सेवा कर वसूली का मामला है और उनके प्रारंभिक आपत्ति प्रार्थना पत्र को खारिज किया जाना अनुचित है, क्योंकि सीपीसी के प्रावधानों के मुताबिक पहले प्रारंभिक आपत्ति तय की जानी चाहिए।

बैंक की ओर से बहस करते हुए अधिवक्ता अनिल भंडारी ने कहा कि त्वरित न्याय के उद्देश्य से 11 जून 2002 को विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम में जन उपयोगी सेवा को जोड़ा गया और धारा 25 के तहत अन्य कानून के तहत मामला होने पर भी स्थाई लोक अदालत को सुनवाई का क्षेत्राधिकार दिया गया है और आर्बिट्रेशन का प्रावधान होने के बावजूद भी सुनवाई की जा सकती है।उन्होंने कहा कि बैंक ने जनवरी 2019 में अदालत में प्रार्थना पत्र पेश किए,लेकिन दो साल बाद बीमा कंपनी ने प्रारंभिक आपत्ति का प्रार्थना पत्र पेश किया है और चार साल से अधिक समय हो जाने पर भी अभी तक मूल प्रार्थना पत्र का जवाब नहीं दिया है और इस अधिनियम में दिवानी प्रक्रिया संहिता के प्रावधान लागू नहीं होते है सो रिट याचिका खारिज की जाएं।

राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश डा पुष्पेंद्र सिंह भाटी ने दोनों रिट याचिका खारिज करते हुए कहा कि बीमा कंपनी की ओर से प्रारंभिक आपत्ति का प्रार्थना पत्र दो साल बाद दायर किया है तथा बैंक की ओर से वर्ष 2019 में दायर मूल प्रार्थना पत्र का जवाब अभी तक भी दाखिल नहीं किया गया है

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