उत्तराखंडहरिद्वार

लातविया के 20 सदस्यीय दल ने शांतिकुंज में जाना भारतीय संस्कृति का सार

गायत्री यज्ञ में लिया भाग, योग-अध्यात्म और मूल्य आधारित शिक्षा की सराहना

जन एक्सप्रेस/हरिद्वार: उत्तरी यूरोप के देश Latvia से आए 20 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने Shantikunj स्थित Dev Sanskriti Vishwavidyalaya में भारतीय संस्कृति, योग और अध्यात्म का गहन अध्ययन किया।  जेलेना के नेतृत्व में आए इस दल का विश्वविद्यालय परिवार ने पारंपरिक भारतीय रीति-रिवाजों से स्वागत किया।

देव संस्कृति विश्वविद्यालय और लातविया के बीच हुए शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक समझौते के तहत यह प्रतिनिधिमंडल भारत आया है। इसका उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा, वैदिक जीवन दर्शन, योग और अध्यात्म को करीब से समझना है।

प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय की यज्ञशाला में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच गायत्री यज्ञ में भाग लिया। यज्ञाचार्यों ने यज्ञ के आध्यात्मिक, वैज्ञानिक और पर्यावरणीय महत्व को विस्तार से समझाया। लातवियाई मेहमानों ने भारतीय परंपरा में निहित सकारात्मक ऊर्जा और प्रकृति के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण की सराहना की।

दल के सदस्यों ने विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति युवा आइकॉन Dr. Chinmay Pandya से भेंट कर मार्गदर्शन प्राप्त किया। डॉ. पण्ड्या ने कहा कि भारतीय संस्कृति, योग और यज्ञ केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी मानवता के कल्याण का मार्ग दिखाते हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि आज के समय में मूल्य आधारित शिक्षा और आध्यात्मिक चेतना की अत्यंत आवश्यकता है।

प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों, शोध प्रयोगशालाओं, योग एवं ध्यान केंद्रों का भ्रमण किया और वहां चल रहे शैक्षणिक, शोध एवं समाजसेवी कार्यों की जानकारी ली। मेहमानों ने परिसर के अनुशासित वातावरण, आध्यात्मिक सोच और मूल्यों पर आधारित शिक्षा प्रणाली की प्रशंसा की।

लातवियाई दल के सदस्यों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यह यात्रा उनके लिए अत्यंत प्रेरणादायक और अविस्मरणीय रही। उन्होंने कहा कि इस भ्रमण से भारतीय संस्कृति और अध्यात्म के प्रति उनकी समझ और भी गहरी हुई है तथा यह मानवता के कल्याण का सशक्त मार्ग है।

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