
जन एक्सप्रेस /पुरोला :- ग्राम पंचायत कुरुडा के छाड़ा गांव के 23 परिवारों के नाम जारी पानी के बिलों और कथित बकाया राशि की वसूली को लेकर ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों ने बुधवार को उप जिलाधिकारी मुकेश रमोला के माध्यम से जिलाधिकारी उत्तरकाशी और जल संस्थान के संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का आरोप है कि वर्ष 2022-23 से अब तक संबंधित परिवारों के नाम पर जल बिल तैयार किए गए हैं, जबकि वर्ष 2023 से जल जीवन मिशन के तहत पेयजल सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद जल संस्थान की ओर से बिलिंग की गई। ग्रामीणों ने बिल जारी करने का आधार, संबंधित बिलों की प्राप्ति-वितरण का अभिलेख और बकाया राशि निर्धारित करने के आधार पर भी सवाल उठाए हैं।
पत्र में कहा गया है कि यदि बिल वास्तव में जारी किए गए थे तो क्या उन्हें ग्रामवासियों तक नियमानुसार पहुंचाया गया। साथ ही आरसी जारी करने से पूर्व संबंधित परिवारों को नियमानुसार मांग-पत्र या नोटिस दिए गए थे अथवा नहीं, इसकी भी जांच की जानी चाहिए। ग्रामीणों का कहना है कि बिना पूर्व सूचना और बकाया राशि के सत्यापन के आरसी की कार्रवाई किए जाने से परिवारों को मानसिक परेशानी और आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि 23 परिवारों के विरुद्ध जारी वसूली प्रमाण-पत्र (आरसी) की कार्रवाई तत्काल स्थगित कर वापस ली जाए। वर्ष 2022-23 से अब तक तैयार किए गए जल बिलों और कथित बकाया राशि की निष्पक्ष जांच कराई जाए। इसके अलावा जल जीवन मिशन के तहत उपलब्ध कराई गई पेयजल व्यवस्था और जल संस्थान द्वारा की गई बिलिंग से संबंधित अभिलेखों का मिलान एवं सत्यापन भी कराया जाए।
पत्र में यह भी मांग की गई है कि यदि किसी परिवार पर वास्तविक रूप से वैध बकाया राशि बनती है तो उसे बिल की अवधि, मीटर/उपभोग का आधार तथा बकाया राशि का पूरा विवरण उपलब्ध कराया जाए। वहीं, बिना पूर्व सूचना या नोटिस के आरसी जारी किए जाने की शिकायत की प्रशासनिक जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की गई है।
ग्रामीणों ने जांच पूरी होने तक कथित बकाया राशि की वसूली संबंधी कार्रवाई पर रोक लगाने तथा ग्रामवासियों की उपस्थिति में संबंधित विभागीय अधिकारियों और ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों के साथ खुली बैठक/जनसुनवाई कर प्रकरण का समाधान कराने की मांग की है।
ग्रामीणों ने कहा कि मामला केवल 23 परिवारों की आर्थिक परेशानी तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे ग्रामीणों के साथ पारदर्शी एवं निष्पक्ष प्रशासनिक प्रक्रिया सुनिश्चित करने का सवाल भी जुड़ा है। उन्होंने जिलाधिकारी से पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर ग्रामीणों को राहत देने की मांग की है।






