उत्तराखंड

किसान-मजदूरों की आवाज, संयुक्त किसान मोर्चा ने दिया धरना, सरकार को चेताया

गोपेश्वर । संयुक्त किसान मोर्चा और केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों ने मंगलवार को अखिल भारतीय चेतावनी रैली के तहत चमोली जिले में जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में धरना प्रदर्शन किया। साथ ही किसानों और मजदूरों की विभिन्न मांगों को लेकर जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा। संयुक्त किसान मोर्चा और ट्रेड यूनियनों का कहना है कि 26 नवम्बर 2020 को देशभर में मजदूर और किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ आंदोलन शुरू हुआ था, जो अब चार साल पूरे होने को हैं। मोर्चा ने सरकार से किसानों से हुए समझौतों को लागू करने और मजदूर विरोधी नीतियों को बदलने की मांग की गई है।धरने में अखिल भारतीय किसान सभा के अध्यक्ष बस्ती लाल, सीटू के अध्यक्ष मदन मिश्रा और अन्य नेताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाई।

उनके द्वारा उठाई गई मुख्य मांगों में श्रम कोड्स को रद्द करना, न्यूनतम वेतन बढ़ाना, सभी फसलों के लिए कानूनी समर्थन मूल्य की गारंटी देना, स्वामीनाथन आयोग के अनुसार एमएसपी घोषित करना, किसानों के लिए पेंशन योजना लागू करना, बिजली बिल में राहत और सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण पर रोक लगाना शामिल था।इसके अलावा जंगली जानवरों से किसानों और उनके फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, बढ़ती महंगाई पर रोक लगाने और गैस, पेट्रोल, डीजल की कीमतों में वृद्धि वापस लेने की भी मांग की गई। धरने में बस्ती लाल, मदन मिश्रा, ज्ञानेंद्र खंतवाल, मनमोहन रौतेला, रमेशचंद्र, प्रकाश चैहान, दीपक कुमार, गीता बिष्ट सहित कई नेता और कार्यकर्ता शामिल थे।

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