ARTO कार्यालय में लाइसेंस के नाम पर लूट
चार हजार हज़म, लाइसेंस गायब! दलाल-बाबुओं का खेल उजागर

जन एक्सप्रेसचित्रकूट/ जनपद के सहायक सम्भागीय परिवहन कार्यालय (ARTO) से जुड़ा एक बड़ा भ्रष्टाचार सामने आया है। यहां बनकट गांव के अशोक नामक युवक से परमानेंट ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के नाम पर चार हजार रुपए वसूल लिए गए, लेकिन न तो लाइसेंस मिला और न ही कोई जवाबदारी तय हुई।
पीड़ित युवक अशोक ने जिले के आला अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई है और सीधे जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपा है। मामला गंभीर तब हो गया जब युवक ने लाइसेंस प्रक्रिया की पूरी हकीकत बताने वाली रिकॉर्डिंग भी सार्वजनिक कर दी।
क्या है पूरा मामला?
अशोक ने बताया कि उसने ARTO कार्यालय में तैनात दीक्षित नामक प्राइवेट बाबू और दलाल अरविंद से संपर्क कर लाइसेंस के लिए चार हजार रुपए दिए थे। पहले लर्निंग लाइसेंस बना, फिर वादे के मुताबिक परमानेंट लाइसेंस बनना था। लेकिन जैसे ही लर्निंग की वैधता खत्म हुई, बाबू चक्कर कटवाने लगा और फिर से वहीं से खेल शुरू हो गया—नया लर्निंग लाइसेंस बनवा दिया गया!
इस दौरान पीड़ित को न कोई ड्राइविंग टेस्ट दिलवाया गया और न ही किसी वैधानिक प्रक्रिया का पालन किया गया। उल्टा अब दोबारा 3,000 रुपए की डिमांड की जा रही है।
दलाली का काला खेल और प्रशासन की चुप्पी!
पीड़ित युवक का आरोप है कि कार्यालय में बैठा बाबू और दलाल मिलकर पूरे सिस्टम को ठेंगा दिखा रहे हैं। धंधा ऐसा कि परीक्षा के बगैर ही पैसे लेकर लाइसेंस जारी करने की तैयारी होती है। सवाल ये है कि आखिर किसके संरक्षण में यह काला कारोबार चल रहा है?
ARTO विवेक शुक्ला की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। सदर विधायक तक इस भ्रष्टाचार से आहत हैं और उन्होंने परिवहन मंत्री को पत्र भेजकर तत्काल कार्यवाही की मांग की है।
जनता के सवाल:
बिना परीक्षा के कैसे जारी होते हैं ड्राइविंग लाइसेंस?
कार्यालय में प्राइवेट बाबू और दलालों की इतनी हनक किसकी शह पर है?
आखिर ARTO साहब खामोश क्यों हैं?
चित्रकूट ARTO कार्यालय में गहराता भ्रष्टाचार अब किसी से छिपा नहीं। रिकॉर्डिंग, शिकायतें और राजनीतिक हस्तक्षेप के बावजूद अगर कार्यवाही नहीं होती, तो यह स्पष्ट संकेत होगा कि पूरे सिस्टम में कहीं न कहीं सड़न है।






