उत्तराखंडदेहरादून

जनसुरक्षा में बाधा बनीं शराब की दुकानें सील, 6 के लाइसेंस निलंबित

जन एक्सप्रेस/देहरादून(उत्तराखण्ड) : मुख्यमंत्री के “सुरक्षित जन” संकल्प को मूर्त रूप देते हुए जिला प्रशासन ने जनसुरक्षा और यातायात व्यवस्था को बाधित कर रहीं 6 शराब की दुकानों के लाइसेंस निलंबित कर दिए हैं। ये कार्रवाई जिलाधिकारी सविन बंसल की अध्यक्षता में गठित जीवनदायिनी सड़क सुरक्षा समिति की संस्तुतियों के आधार पर की गई।

जिन दुकानों पर कार्रवाई की गई है, वे शहर के अत्यंत संवेदनशील और ट्रैफिक जाम से ग्रस्त क्षेत्रों में स्थित थीं, जिनमें जीएमएस रोड (विदेशी मदिरा), बिंदालपुल चकराता रोड-2 (विदेशी), डालनवाला निकट परेड ग्राउंड, अधोईवाला चूना भट्टा (देशी-विदेशी), और करनपुर परेड ग्राउंड (देशी मदिरा) की दुकानें शामिल हैं।

कोर्ट और आयुक्त दोनों ने माना डीएम का निर्णय उचित

इन दुकानदारों द्वारा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आदेशों को चुनौती दी गई थी, जिसे उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया। साथ ही, आबकारी आयुक्त ने भी डीएम के फैसले से सहमति जताई है। यानि अब यह आदेश पूरी तरह वैध और क्रियान्वयन योग्य है।

यातायात में बाधा और जनआक्रोश बना कारण

27 मार्च को आयोजित सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और यातायात पुलिस अधीक्षक ने रिपोर्ट प्रस्तुत की थी कि उक्त 6 शराब की दुकानें सड़क हादसों और ट्रैफिक जाम की मुख्य वजह हैं। इन दुकानों के कारण राहगीरों, महिलाओं, छात्रों और स्थानीय नागरिकों को असुविधा हो रही थी और कई बार जनआक्रोश भी देखने को मिला।

आदेश की अनदेखी पर सीधी कार्रवाई

डीएम ने पहले ही इन दुकानों को 1 सप्ताह के भीतर स्थानांतरित करने के आदेश दिए थे। आदेशों की अवहेलना करने पर जिला प्रशासन ने इन सभी दुकानों पर ताले लगाकर उनके लाइसेंस निलंबित कर दिए।

डीएम का सख्त संदेश: जनसुरक्षा सर्वोपरि

जिलाधिकारी सविन बंसल ने स्पष्ट किया कि जनसुरक्षा और जनजीवन से जुड़ी किसी भी बाधा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट द्वारा सशक्त बनाई गई जिला सड़क सुरक्षा समिति निरंतर जनहित में कठोर लेकिन न्यायोचित निर्णय ले रही है।

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