उत्तरकाशीउत्तराखंड

धराली में तबाही का मंजर: छह बार आया मलबे का सैलाब, समेश्वर देवता का मंदिर रहा अडिग

समेश्वर देवता का मंदिर चमत्कारिक रूप से सुरक्षित, आसपास के घर मलबे में दबे

जन एक्सप्रेस उत्तरकाशी (धराली): बीते मंगलवार दोपहर करीब 1:50 बजे उत्तरकाशी जिले के धराली गांव में खीर गंगा से आया पानी और मलबे का सैलाब तबाही की ऐसी तस्वीर लेकर आया, जिसे देखकर हर आंख नम हो उठी। मात्र 20 से 30 सेकेंड के भीतर इस बाढ़ ने पूरे धराली बाजार को तहस-नहस कर दिया। होटल, दुकानें, बगीचे और यहां तक कि पांडवकालीन कल्प केदार मंदिर भी इस मलबे की चपेट में आ गए और जमींदोज हो गए। कई लोग मलबे में दब गए, हालांकि मलबे में दबे लोगों की सटीक संख्या देर रात तक स्पष्ट नहीं हो पाई थी।

एक के बाद एक छह बार आया सैलाब

इस आपदा की भयावहता यहीं नहीं रुकी। मंगलवार देर शाम तक खीर गंगा से करीब 5 से 6 बार मलबे का सैलाब आता रहा। हर बार नया मलबा लाकर इसने न सिर्फ धराली बाजार, बल्कि नदी के दूसरी ओर बसे ग्रामीणों के घरों को भी अपनी चपेट में ले लिया।बास्केटबॉल मैदान से लेकर भागीरथी नदी तक का करीब 1 किलोमीटर क्षेत्र अब एक खुले मैदान में तब्दील हो चुका है, जहां कभी बाजार और घर थे।

चमत्कार या आस्था: सुरक्षित रहा समेश्वर देवता मंदिर

इस पूरी तबाही के बीच एकमात्र राहत भरी खबर यह रही कि धराली गांव में स्थित समेश्वर देवता का प्राचीन मंदिर पूरी तरह सुरक्षित रहा। हैरानी की बात यह है कि मंदिर के चारों ओर बने घर और भवन मलबे में दब गए, लेकिन देवस्थान को कोई क्षति नहीं पहुंची। यहां रह रहे लोगों को प्रशासन द्वारा रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया है।

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