चाइल्ड केयर अस्पताल बना गुंडागर्दी का अड्डा
बच्चे को देखने पहुंचे परिजनों की स्टाफ ने की पिटाई

जन एक्सप्रेस/शाहगंज: शाहगंज कोतवाली क्षेत्र के अन्तर्गत नगर के आजमगढ़ मार्ग स्थित नई सब्जी मंडी के पीछे बना बहुचर्चित चाइल्ड केयर अस्पताल एक बार फिर सुर्खियों में है। आए दिन मरीजों और उनके परिजनों से मारपीट के मामलों के बावजूद प्रशासनिक अधिकारियों की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। बुधवार की रात अस्पताल स्टाफ की गुंडागर्दी का ताजा मामला सामने आया है, जिसमें इलाज कराने पहुंचे परिजनों के साथ बर्बरता की गई।
जनपद आजमगढ़ के पवई थाना क्षेत्र माहुल सहराजा निवासी मामा विवेक कुमार ने बताया कि अपने बीमार बच्चे को इलाज के लिए उक्त अस्पताल लाया था। डॉक्टर ने बच्चे को आईसीयू में भर्ती कर लिया। जब बच्चे के परिजन—पिता दुर्गेश , माता संगम , मामा राम अशीष और नानी प्रेमशीला —बच्चे को देखने पहुंचे, तो वहां तैनात स्टाफ ने उन्हें रोक दिया। इसके बावजूद जब परिजन बच्चे को देखने आईसीयू में गए, तो स्टाफ ने उनसे अभद्रता शुरू कर दी।
देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि अस्पताल के स्टाफ ने पीड़ित परिवार को लात-घूंसों और थप्पड़ों से पीटना शुरू कर दिया। आरोप है कि इसी दौरान एक महिला का ब्लाउज भी फाड़ दिया गया। जबकि मौके पर मौजूद चिकित्सक तमाशबीन बने रहे और किसी ने रोकने की कोशिश तक नहीं की।
पीड़ित परिवार ने मामले की सूचना पुलिस को दी। सूचना पर पहुंची कोतवाली पुलिस ने पीड़ितों को अस्पताल से थाने ले गई। परिवार का आरोप है कि पुलिस ने भी उन्हें पीटकर जबरन सुलह समझौता करने का दबाव बनाया। जब उन्होंने इनकार किया तो पुलिस ने फिर से मारपीट की और समझौते पर हस्ताक्षर करवाए।
पीड़ित परिवार देर रात तक न्याय के लिए भटकता रहा, लेकिन किसी ने उनकी नहीं सुनी। थकहारकर उन्होंने उच्चाधिकारियों से लिखित शिकायत कर अस्पताल संचालक, स्टाफ और संबंधित चिकित्सक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
इस संबंध में अस्पताल के चिकित्सक से बात करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने अपना मोबाइल बंद कर दिया है।
प्रभारी निरीक्षक किरन कुमार सिंह ने बताया कि मामला संज्ञान में है जांच की जा रही है।
गौरतलब है कि इससे पहले 18 अगस्त को भी फूलपुर की एक महिला ने इसी अस्पताल पर अपने बच्चे को गलत दवा देने से मौत होने और स्टाफ द्वारा अभद्रता करने का गंभीर आरोप लगाया था। इसके बावजूद न तो कोई जांच हुई और न ही कार्रवाई।
जनता में आक्रोश
लगातार हो रही घटनाओं से क्षेत्रीय नागरिकों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि इस अस्पताल में इलाज के नाम पर मनमानी और उत्पीड़न आम बात हो गई है। अब जनता मांग कर रही है कि प्रशासन तत्काल जांच कर अस्पताल की लाइसेंस रद्द करे और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करे, ताकि आम लोगों को न्याय मिल सके।






