रानीपुर टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी शुरू, पर्यटक अब बाघों और वन्यजीवों को करीब से देख सकेंगे

जन एक्सप्रेस चित्रकूट(हेमनारायण हेमू): रानीपुर टाइगर रिजर्व पर्यटकों के लिए पूरी तरह तैयार है। टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी का शुभारंभ कर दिया गया है। वन निगम द्वारा शुरू की गई इस सुविधा से पर्यटक अब बाघों और अन्य वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में देख सकेंगे। यह पहल पर्यटन को बढ़ावा देने और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से की गई है।
शनिवार को रानीपुर टाइगर रिजर्व के मारकुंडी वन परिक्षेत्र अंतर्गत जाम्बवन्त इको पर्यटन केंद्र किहुनियाँ मारकुंडी में टाइगर सफारी की शुरुआत हुई। वन संरक्षक बांदा/फील्ड डायरेक्टर रानीपुर टाइगर रिजर्व डॉ. मनोज शुक्ला ने हरी झंडी दिखाकर इसका औपचारिक शुभारंभ किया और स्वयं सफारी का आनंद लिया। बारिश के बाद हरे-भरे जंगल अब आम सैलानियों के लिए खोल दिए गए हैं।
उत्तर प्रदेश वन विभाग ने सफारी की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं, जिसमें पर्यटकों को रोमांचक अनुभव प्रदान करने के लिए उत्तर प्रदेश वन निगम की दो सफारी गाड़ियां तैनात की गई हैं। रानीपुर टाइगर रिजर्व प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीव दर्शकों के लिए एक आकर्षक गंतव्य बन गया है। यहां पर्यटक बाघ, तेंदुआ, हिरन, भालू समेत कई दुर्लभ वन्यजीवों को करीब से देख सकेंगे।इस मौके पर टाइगर रिजर्व के एसडीओ राजीव रंजन, रेंजर मानिकपुर सुशील श्रीवास्तव, रेंजर मानिकपुर द्वितीय, पूर्व प्रधान की कीहुनियां विनय द्विवेदी, सामाजिक कार्यकर्ता देव शुक्ला समेत दर्जनों की संख्या ग्रामीण मौजूद रहे।रिजर्व में सफारी के लिए चार अलग-अलग रूट तय किए गए हैं, जिनमें किहुनिया से चौरी और चौरी से कल्याणपुर गेट तक के मार्ग शामिल हैं। एक बार की सफारी लगभग 30 किलोमीटर की होगी, जिससे पर्यटकों को जंगल की गहराइयों और प्राकृतिक सुंदरता का अद्भुत अनुभव मिलेगा।रिजर्व में प्रवेश का गेट मारकुंडी के पास बनाया गया है, जहां टिकट की बुकिंग की जा सकती है। पर्यटक 2500 रुपये में जिप्सी बुक कर जंगल की सैर कर सकते हैं। प्रवेश शुल्क प्रति व्यक्ति 80 रुपये है, जबकि विदेशी सैलानियों के लिए यह 1000 रुपये निर्धारित है। पांच से 12 वर्ष के बच्चों का टिकट 25 रुपये तथा विदेशी बच्चों का 300 रुपये रखा गया है। पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रवेश नि:शुल्क है। स्थानीय विद्यालयों के बच्चों को स्कूल की अनुमति के आधार पर मुफ्त सफारी कराई जाएगी।
रात्रि विश्राम के लिए ‘स्वीट काटेज’ बनाए गए हैं
वन विभाग ने यहां आने वाले सैलानियों के लिए सफारी वाहनों, प्रवेश, कैमरा और ठहरने की व्यवस्था के लिए नए नियम और शुल्क निर्धारित किए हैं। वन विभाग ने बताया कि विभाग का प्रयास है कि पर्यटक जंगल की सुंदरता, वन्यजीवों और ईको-टूरिज्म का अविस्मरणीय अनुभव लेकर जाएं। सफारी वाहनों के लिए वन विभाग में 5000 रुपये का पंजीकरण अनिवार्य है। जिप्सी सफारी के लिए भारतीय पर्यटकों को 2500 रुपये का शुल्क देना होगा। इसके अतिरिक्त, भारतीय पर्यटकों के लिए प्रवेश शुल्क 80 रुपये और विदेशी पर्यटकों के लिए 1000 रुपये निर्धारित किया गया है।कैमरा ले जाने पर भारतीय पर्यटकों को 450 रुपये और विदेशी पर्यटकों को 1800 रुपये का शुल्क देना होगा। व्यावसायिक शूटिंग के लिए सक्षम अधिकारी की अनुमति के साथ 8500 रुपये का शुल्क अनिवार्य है। पर्यटकों के ठहरने के लिए किहुनिया क्षेत्र में चार आकर्षक ‘स्वीट कॉटेज’ बनाए गए हैं। इन कॉटेज का प्रति रात किराया भारतीय पर्यटकों के लिए 3000 रुपये और विदेशी पर्यटकों के लिए 6000 रुपये तय किया गया है, जहाँ वे जंगल की शांति का अनुभव कर सकते हैं।
मानिकपुर से ऑटो या कार से पहुंच सकते हैं प्रवेश द्वार
रानीपुर टाइगर रिजर्व तक पहुंचने के लिए मानिकपुर जंक्शन सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन है। यह रिजर्व से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। ट्रेन से यात्रा करने वाले पर्यटक मानिकपुर स्टेशन से ऑटो या कार किराए पर लेकर मारकुंडी स्थित टाइगर रिजर्व के प्रवेश द्वार तक पहुंच सकते हैं। बस से आने वाले यात्रियों के लिए चित्रकूटधाम कर्वी बस स्टैंड सबसे नजदीकी पड़ाव है। यहां से टाइगर रिजर्व की दूरी लगभग 65 किलोमीटर है।






