उत्तर प्रदेशपीलीभीत
टाइगर रिजर्व के पास बाघ के हमले से किसान की मौत, ग्रामीणों में दहशत
जंगल में मिला अधखाया शव, गांव में मातम का माहौल वन विभाग व प्रशासन ने शुरू किया सर्च ऑपरेशन

जन एक्सप्रेस पूरनपुर (पीलीभीत)। पीलीभीत टाइगर रिजर्व से सटे इलाकों में बाघ का आतंक एक बार फिर देखने को मिला है। बुधवार की रात बराही रेंज की नवदिया बीट के पास ग्राम टांडा छत्रपति में खेत पर रखवाली कर रहे किसान पर बाघ ने हमला कर दिया, जिससे उसकी दर्दनाक मौत हो गई। गुरुवार सुबह जंगल के भीतर किसान का अधखाया शव मिलने से गांव में कोहराम मच गया और पूरे क्षेत्र में दहशत फैल गई।जानकारी के अनुसार, ग्राम टांडा छत्रपति निवासी 45 वर्षीय छोटे लाल पुत्र खेमकरन मंगलवार की शाम रोज की तरह फसल की रखवाली करने खेत पर गए थे। खेत पीलीभीत टाइगर रिजर्व के बराही रेंज की नवदिया बीट से सटा हुआ है। देर रात तक जब वे घर नहीं लौटे तो परिवार को चिंता हुई। बुधवार सुबह ग्रामीणों ने खेत के पास कुछ पगचिह्न और झाड़ियों में खून के निशान देखे। थोड़ी ही दूरी पर छोटे लाल का अधखाया शव पड़ा मिला। यह दृश्य देख ग्रामीणों में भय और आक्रोश दोनों फैल गया।ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग और पुलिस प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं। बराही रेंज के रेंजर अरुण मोहन श्रीवास्तव ने बताया कि शव की स्थिति स्पष्ट रूप से बाघ के हमले की ओर संकेत करती है। पगचिह्नों और घटनास्थल की जांच की जा रही है। टीम ने बाघ की मौजूदगी का पता लगाने के लिए सर्च ऑपरेशन शुरू किया है।पूरनपुर क्षेत्राधिकारी प्रतीक दहिया, कोतवाल पवन कुमार पांडे, तहसीलदार और ग्राम प्रधानों के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। मृतक किसान के परिवार में दो छोटे बच्चे हैं। 16 वर्षीय बेटी और 12 वर्षीय बेटा। पिता की दर्दनाक मौत की खबर मिलते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।ग्रामीणों ने बताया कि टाइगर रिजर्व से सटे गांवों में बाघों की गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। इससे पहले भी कई घटनाओं में ग्रामीण अपनी जान गंवा चुके हैं, लेकिन वन विभाग द्वारा प्रभावी कार्रवाई न होने से लोगों में गहरा रोष है। ग्रामीणों ने वन विभाग से मांग की कि गांव के आसपास के इलाकों में गश्त बढ़ाई जाए और बाघ को जल्द पकड़ा जाए ताकि लोग भयमुक्त होकर खेती-बाड़ी कर सकें।घटना की गंभीरता को देखते हुए पूरनपुर विधायक पुत्र ऋतुराज पासवान भी मौके पर पहुंचे और मृतक के परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने परिवार को ढांढस बंधाया और कहा कि सरकार की ओर से जो भी मुआवजा देय होगा, उसे दिलाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा।

वन विभाग की टीम ने गुरुवार को भी जंगल में सघन सर्च ऑपरेशन चलाया, जिसमें बाघ की लोकेशन ट्रेस करने की कोशिश की जा रही है। विभाग ने आसपास के गांवों के लोगों को खेतों में अकेले न जाने और सतर्क रहने की अपील की है।टाइगर रिजर्व से सटे इलाकों में यह पहली घटना नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि बीते महीनों में बाघ के हमले से कई लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन न तो बाघ को पकड़ा गया और न ही सुरक्षा के स्थायी उपाय किए गए। इससे क्षेत्र में भय का माहौल बना हुआ है।छोटे लाल की मौत के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है। परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर बताई जा रही है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मुआवजा देने के साथ-साथ ऐसे किसानों के परिवारों के लिए स्थायी सहायता योजना बनाने की मांग की है, जो जंगल किनारे रहकर हर पल बाघ के खतरे में जीवन यापन कर रहे हैं।
इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि पीलीभीत टाइगर रिजर्व से सटे गांवों में इंसान और वन्यजीव के बीच टकराव आखिर कब थमेगा। जब तक जंगल की सीमा से लगे गांवों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोक पाना मुश्किल होगा।






