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बेसमेंट अस्पतालों पर कार्रवाई ठप? पत्रकारों द्वारा सौंपे गए वीडियो के बाद भी मंडरा रहे सवाल

जन एक्सप्रेस/जौनपुर: जौनपुर जिलाधिकारी द्वारा हाल ही में जारी उस आदेश को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं, जिसमें निर्देश दिए गए थे कि ज़िले में बेसमेंट में संचालित अस्पतालों को बंद कराया जाए तथा ऐसे सभी चिकित्सालयों पर आवश्यक कार्रवाई हो जो निर्धारित मानकों का पालन नहीं कर रहे। आदेश के बावजूद अब तक कुछ अस्पतालों पर कार्रवाई न होने के कारण यह मुद्दा चर्चा में है।

सूत्रों के अनुसार, तीन दिन पहले पत्रकारों के एक दल ने सीएमओ डॉ. लक्ष्मी सिंह को दो अस्पतालों के वीडियो बतौर प्रमाण सौंपे थे। वीडियो में कथित रूप से बेसमेंट में उपचार होता दिखने और रजिस्ट्रेशन न होने की बात सामने आई थी।

इनमें पहला अस्पताल नन्द हॉस्पिटल, सिद्दीकपुर बताया गया, जहाँ कथित रूप से बेसमेंट में आईसीयू संचालित होने का दावा किया गया था। दूसरा मामला समृद्धि हॉस्पिटल, रसूलाबाद का था, जिसके बारे में रजिस्ट्रेशन न होने की शिकायत प्रस्तुत की गई थी।

मौके पर मौजूद पत्रकारों के अनुसार, सीएमओ ने निर्देश दिए थे कि जिन संस्थानों में अनियमितताएँ पाई जाएँगी, उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाएगी तथा संबंधित टीम को नन्द हॉस्पिटल और समृद्धि हॉस्पिटल में जाकर जांच एवं आवश्यक कार्यवाही करने के लिए कहा गया था।

हालाँकि, समाचार लिखे जाने तक नन्द हॉस्पिटल पर कार्रवाई न होने की बात सामने आई है, जिससे प्रशासनिक मशीनरी की तत्परता पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों व पत्रकारों का कहना है कि यदि जिलाधिकारी और सीएमओ के आदेशों का समयबद्ध अनुपालन नहीं हुआ, तो यह गंभीर प्रशासनिक चूक मानी जाएगी।

इस बीच, स्वास्थ्य विभाग के कुछ सूत्रों का कहना है कि जांच प्रक्रिया औपचारिकता के तहत समय ले सकती है, जबकि कुछ का मानना है कि जनपद में कई ऐसे अस्पताल व क्लीनिक हैं जिनकी जांच आवश्यक है, परंतु उपलब्ध संसाधनों और स्टाफ की कमी के चलते कार्रवाई में विलंब होता है।

फिलहाल, ज़िले में संचालित अस्पतालों की वास्तविक स्थिति, रजिस्ट्रेशन, बेसमेंट संचालन और मानकों के अनुपालन को लेकर स्वास्थ्य विभाग की भूमिका और कार्यवाही की गति पर जनता की निगाहें टिकी हुई हैं।

प्रशासन पर यह दबाव बढ़ रहा है कि वह जांच में पारदर्शिता रखे और जिलाधिकारी के आदेशों का पालन सुनिश्चित करे—ताकि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही या नियमों की अनदेखी न होने पाए।

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