उत्तराखंडहरिद्वार

स्वावलंबन कार्यशाला में आकार ले रहा आस्था का विराट स्वरूप

गायत्री महामंत्र के लिए तैयार हो रहा 200 फीट लंबा लोहे का स्टैण्ड

जन एक्सप्रेस हरिद्वार/(चंद्रप्रकाश बहुगुणा): शांतिकुंज की स्वावलंबन कार्यशाला में इन दिनों साधना और शिल्प का अद्भुत समन्वय देखने को मिल रहा है। जन्मशताब्दी समारोह के लिए यहाँ गायत्री महामंत्र को प्रतिष्ठित करने हेतु 200 फीट लंबा व शताब्दी समारोह हेतु लोहे का भव्य स्टैण्ड तैयार किया जा रहा है, जो श्रद्धा, संकल्प और तकनीकी कौशल, तीनों का सजीव प्रतीक बनेगा।स्वावलंबन कार्यशाला के प्रभारी मोहनलाल गौतम ने बताया कि यह स्टैण्ड केवल लोहे संरचना नहीं, बल्कि विचारों को दृढ़ आधार देने वाला माध्यम है। उन्होंने कहा कि इसकी रूपरेखा इस प्रकार तैयार की गई है कि यह मजबूत, सुरक्षित और दीर्घकाल तक उपयोग योग्य हो, साथ ही गायत्री महामंत्र की गरिमा और पवित्रता को भी पूर्ण रूप से अभिव्यक्त करे। श्री गौतम ने बताया कि स्टैण्ड के निर्माण में गुणवत्ता, संतुलन और सुरक्षा के प्रत्येक मानक का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। कार्यशाला के कारीगर इसे सेवा-भाव से गढ़ रहे हैं, जहाँ हर वेल्डिंग और हर जोड़ साधना के भाव से किया जा रहा है। स्वावलंबन कार्यशाला में चल रहा यह कार्य स्पष्ट करता है कि शांतिकुंज में निर्माण केवल भौतिक ढाँचे खड़े करने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि आध्यात्मिक विचारों को स्थायित्व देने की साधना है। जन्मशताब्दी समारोह में यह 200 फीट लंबा स्टैण्ड न केवल दृश्य आकर्षण बनेगा, बल्कि गायत्री महामंत्र की सार्वभौमिक चेतना को जन-जन तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम भी सिद्ध होगा। जब लोहे के बने इस स्टैण्ड में दीपक जलाये जायेंगे, तो वह केवल प्रकाश का दृश्य नहीं होगा, बल्कि युगचेतना का प्रज्वलन होगा। जब लोहे के बने इस विराट स्टैण्ड पर दीपक प्रज्वलित किए जाएंगे, तब प्रत्येक ज्योति अज्ञान से ज्ञान की ओर, स्वार्थ से सेवा की ओर और अंधकार से प्रकाश की ओर मानवता की यात्रा का प्रतीक बनेगी।जन्मशताब्दी समारोह में यह संरचना केवल देखने योग्य स्थापत्य नहीं होगी, बल्कि युगऋषि के चिंतन को जन-जन के अंत:करण तक पहुँचाने वाली प्रकाश-धारा बनेगी। जब दीपकों की पंक्तियाँ गायत्री महामंत्र के अक्षरों के साथ आलोकित होंगी, तब यह संदेश स्वत: प्रसारित होगा कि युग परिवर्तन हथियारों से नहीं, विचारों की ज्योति से होता है। इस प्रकार स्वावलंबन कार्यशाला में आकार ले रहा यह विराट स्वरूप आने वाली पीढिय़ों के लिए प्रेरणा बनेगा कि जब साधना में श्रम जुड़ता है और श्रम की में साधना, तब निर्माण केवल ढाँचा नहीं रहता, वह इतिहास का दिशा-सूचक बन जाता है।अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुखद्वय श्रद्धेय डॉ प्रणव पण्ड्या एवं श्रद्धेया शैलदीदी ने बताया कि गायत्री महामंत्र को जप का विषय ही नहीं, वरन् मानव चेतना के उत्कर्ष का विज्ञान बताया है। उन्होंने बताया कि इस युग के विश्वामित्र युगद्रष्टा पं श्रीराम शर्मा आचार्यश्री ने अपने प्रवचनों में कहा है कि गायत्री वह दिव्य ऊर्जा है जो विचारों को शुद्ध करती है, संस्कारों को परिष्कृत करती है और समाज को नवदिशा देती है। प्रमुखद्वय ने बताया कि शांतिकुंज में तैयार हो रहा यह 200 फीट लंबा स्टैण्ड उसी विचार-क्रांति का स्थूल प्रतीक है, जहाँ मंत्र, मशीन और मनुष्य एक ही लक्ष्य के लिए समर्पित हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button