कोडीन कफ सिरप पर विपक्ष का भ्रम फैलाना, यूपी में किसी की मौत नहीं: सरकार
एनडीपीएस एक्ट के तहत होगी कार्रवाई, हाईकोर्ट में सरकार ने मामला जीता

जन एक्सप्रेस/लखनऊ।उत्तर प्रदेश में कोडीन कफ सिरप को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर सरकार ने सख्त और स्पष्ट रुख अपनाया है। सरकार का कहना है कि उत्तर प्रदेश में कोडीन कफ सिरप से किसी भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई है, और इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है।सरकारी पक्ष के अनुसार, जो मुद्दा उठाया गया था वह नकली दवाओं के सेवन से होने वाली मौतों को लेकर था, लेकिन उत्तर प्रदेश में अब तक नकली कफ सिरप से मौत का कोई प्रमाणिक मामला सामने नहीं आया है। सरकार पहले भी इस पर स्थिति स्पष्ट कर चुकी है।
होलसेलर पर सबसे पहले एसटीएफ की कार्रवाई, लाइसेंस 2016 में जारी
सरकार ने बताया कि उत्तर प्रदेश में कोडीन कफ सिरप का प्रोडक्शन नहीं होता, यहां केवल स्टॉकिस्ट और होलसेलर हैं।
सबसे पहले जिन बड़े होलसेलरों पर एसटीएफ ने कार्रवाई की, उन्हें 2016 में समाजवादी पार्टी सरकार के दौरान लाइसेंस जारी किए गए थे।
मौत के मामले अन्य राज्यों से जुड़े, तमिलनाडु में बने सिरप से हुई घटनाएं
सरकार के मुताबिक, जिन राज्यों में मौत के प्रकरण सामने आए, वे उत्तर प्रदेश से बाहर के हैं।
मौत के मामले तमिलनाडु में निर्मित सिरप से जुड़े पाए गए हैं, जबकि यूपी में ऐसा कोई प्रकरण दर्ज नहीं है।
यह एडिक्शन नहीं, इल्लीगल डायवर्जन का मामला
सरकार ने स्पष्ट किया कि यह पूरा मामला एडिक्शन का नहीं बल्कि इल्लीगल डायवर्जन का है।
डायवर्जन के जरिए कफ सिरप को उन राज्यों और देशों में पहुंचाया गया, जहां मद्यनिषेध लागू है, लेकिन नशे के आदी लोगों द्वारा इसका दुरुपयोग किया गया।
चिकित्सकीय परामर्श के बिना सेवन खतरनाक, खासकर बच्चों के लिए
सरकारी पक्ष ने कहा कि कफ सिरप एक चिकित्सकीय दवा है, जिसका सेवन डॉक्टर की सलाह से ही किया जाना चाहिए, विशेषकर बच्चों के मामले में।खांसी होने पर लगभग हर व्यक्ति कफ सिरप लेता है, लेकिन बिना परामर्श सेवन गलत है।
अब तक 79 मुकदमे, 225 नामजद, 78 गिरफ्तार
सरकार ने कार्रवाई के आंकड़े भी जारी किए हैं।अब तक इस मामले में—79 अभियोग दर्ज,225 अभियुक्त नामजद,78 अभियुक्त गिरफ्तार,134 फर्मों पर छापेमारी की जा चुकी है।सरकार का दावा है कि जैसे-जैसे जांच गहराई में जा रही है, कहीं न कहीं समाजवादी पार्टी से जुड़े नेता या व्यक्ति सामने आ रहे हैं।इल्लीगल ट्रांजेक्शन का संबंध एक लोहिया वाहिनी से जुड़े नेता के खाते से भी सामने आया है, जिसकी जांच एसटीएफ कर रही है।सरकार ने बताया कि एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार हाईकोर्ट में मामला जीत चुकी है।
सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि समय आने पर बुलडोजर एक्शन भी किया जाएगा।






