सहखातेदार की जमीन से मिट्टी चोरी मामले पर कोर्ट सख्त, एफआईआर दर्ज करने का दिया निर्देश

जन एक्सप्रेस/जौनपुर: जौनपुर जिले के सरायख्वाजा थाना क्षेत्र अंतर्गत सद्धोपुर गांव में सहखातेदारों की भूमि से बिना अनुमति मिट्टी निकालकर बेचने के मामले में जनपद न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। माननीय न्यायालय ने प्रकरण को गंभीर मानते हुए धारा 173(4) बीएनएसएस के अंतर्गत प्रस्तुत प्रार्थना पत्र को स्वीकार कर लिया है और थाना सरायख्वाजा को संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर विधि अनुसार विवेचना करने का निर्देश दिया है।
यह आदेश थाना स्तर पर की गई ढिलाई के बाद आया है, जिससे अब मामले में कानूनी कार्रवाई तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
क्या है पूरा मामला
मामले के वादी शिवश्याम सिंह, निवासी सद्धोपुर थाना बक्शा, जिला जौनपुर ने न्यायालय में दिए गए प्रार्थना पत्र में बताया कि वे अपने भाइयों उदयभान, घनश्याम, तेजभान, स्वर्गीय इन्द्रभान, राधेश्याम, ललितभान सहित अन्य परिजनों के साथ आराजी संख्या 115 के सहखातेदार भूमिधर हैं। इसी भूमि में विनय कुमार सिंह भी सहखातेदार हैं।
प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया कि दिनांक 16 मई 2025 की रात को विनय कुमार सिंह द्वारा बिना किसी सहमति के जेसीबी मशीन से लगभग तीन फीट गहरी खुदाई कर मिट्टी निकाली गई और उसे बेच दिया गया। इसके अलावा कुछ मिट्टी को ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से ले जाकर अपने कब्जे में भी रखा गया।
खनन निरीक्षक और लेखपाल की रिपोर्ट ने की पुष्टि
घटना की शिकायत किए जाने पर खनन निरीक्षक जौनपुर द्वारा 5 जून 2025 को जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया कि सहखातेदारों की अनुमति के बिना खनन कार्य किया गया। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि इस मामले में थाने में प्राथमिकी दर्ज किया जाना उचित है।
इसके अतिरिक्त, राजस्व विभाग के लेखपाल द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में भी आराजी संख्या 115 के एक हिस्से से मिट्टी निकाले जाने की पुष्टि की गई है। इन दोनों रिपोर्टों से अवैध खनन और सहखातेदारी अधिकारों के उल्लंघन की बात सामने आई।
थाने पर नहीं दर्ज हुई एफआईआर
इतने स्पष्ट तथ्यों और रिपोर्टों के बावजूद थाना सरायख्वाजा द्वारा एफआईआर दर्ज नहीं की गई, बल्कि केवल निरोधात्मक कार्रवाई कर मामले को टाल दिया गया। इससे आहत होकर वादी पक्ष ने न्यायालय की शरण ली।
न्यायालय ने माना मुकदमा दर्ज करना आवश्यक
माननीय न्यायालय ने मामले के समस्त तथ्यों, परिस्थितियों और उच्च न्यायालय इलाहाबाद के पूर्व निर्णयों का अवलोकन करने के बाद कहा कि यह मामला संजीदा आपराधिक प्रकृति का है, जिसमें विधिवत मुकदमा दर्ज कर विवेचना कराना आवश्यक है।
न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि थाना सरायख्वाजा, जनपद जौनपुर तत्काल सुसंगत धाराओं में एफआईआर दर्ज कर नियमानुसार जांच सुनिश्चित करे।
अधिवक्ताओं की भूमिका
वादी पक्ष की ओर से अधिवक्ता शेषनाथ सिंह सोलंकी ने प्रभावी पैरवी की। वहीं अभियुक्त विनय सिंह, जो वर्तमान में जौनपुर रेलवे स्टेशन पर पार्सल बाबू के पद पर कार्यरत बताए जा रहे हैं, अब न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में आ गए हैं।
आगे क्या?
न्यायालय के आदेश के बाद अब पुलिस को विवेचना, साक्ष्य संकलन और आरोप तय करने की प्रक्रिया अपनानी होगी। इस फैसले को सहखातेदारों के अधिकारों की सुरक्षा और अवैध खनन के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।






