हमीरपुर: नाबालिग अपहरण और हत्या केस में तीन दोषियों को उम्रकैद, 69 हजार जुर्माना

जन एक्सप्रेस/हमीरपुर: सदर कोतवाली क्षेत्र में 19 अक्टूबर 2016 को हुई नाबालिग बेटी के अपहरण और हत्या की संगीन वारदात में अदालत ने तीन दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके अलावा सभी दोषियों पर कुल 69 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
जानकारी अनुसार, पीड़ित की माँ की तहरीर पर सदर कोतवाली में कदौरा थाना क्षेत्र के हरचन्द्रपुर के निवासी गौरव पुत्र रंगबाज उर्फ रामनाथ, अजीत उर्फ कुग्गी पुत्र रामप्रकाश, सन्दीप पुत्र सुखराम और मोहित पुत्र विश्वनाथ के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। इन पर आईपीसी की धारा 363 (अपहरण), 366 (बलात्कार के लिए अपहरण), 302/34 (हत्या, आपसी साजिश), 201 (सबूत नष्ट करना), 376(D) (बालिका से यौन अपराध) और 6 पाक्सो अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।
इस गंभीर मामले की जांच तत्कालीन एसआई चंचल कुमार यादव ने पूरी की और चार्जशीट अदालत में दाखिल की। अभियोजन की ओर से एडीजीसी रुद्रप्रताप सिंह ने सख्त पैरवी करते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी सजा की मांग की थी।
हाल ही में पाक्सो अदालत की स्कालर जज ने सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुनाते हुए गौरव, अजीत और सन्दीप को उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही, अदालत ने इन तीनों दोषियों पर तेईस-तेईस हजार रुपये का जुर्माना, कुल मिलाकर 69 हजार रुपये, भी लगाया।
वहीं चौथा नाबालिग आरोपी मोहित की फाइल किशोर न्याय बोर्ड में विचाराधीन है। अदालत के निर्णय के अनुसार किशोर न्याय बोर्ड के आदेश के बाद ही उसकी सजा तय होगी।
सदर कोतवाली क्षेत्र में 19 अक्टूबर 2016 को हुई घटना में, नाबालिग को बहला-फुसलाकर घर से भगाया गया था। आरोपियों ने उसके साथ बलात्कार की वारदात को अंजाम देने के बाद उसे हत्या कर दी। घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी।
पीड़ित परिवार ने लंबे समय तक न्याय के लिए संघर्ष किया। इस दौरान पुलिस ने सघन जांच की, गवाहों और सबूतों को अदालत में पेश किया, और सभी दोषियों को न्यायालय तक पहुँचाया। अदालत ने दोषियों के अपराधों की गंभीरता को देखते हुए सख्त सजा सुनाई।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के संगीन मामलों में कानून व्यवस्था और न्यायपालिका की सक्रियता ही पीड़ितों के लिए राहत का सबसे बड़ा जरिया होती है। अदालत के इस फैसले से यह संदेश भी जाता है कि नाबालिगों के खिलाफ अपराध करने वालों को कानूनी ढांचे के भीतर कठोरतम सजा दी जाएगी।
पीड़ित परिवार ने अदालत के फैसले को न्यायपूर्ण बताते हुए कहा कि यह निर्णय उनके लिए मानसिक शांति और न्याय का अनुभव लेकर आया है। वहीं पुलिस प्रशासन ने भी अपने अधिकार क्षेत्र में कार्रवाई कर अपराधियों को न्याय के कटघरे में खड़ा करने का भरोसा दिलाया।
यह मामला न केवल हमीरपुर बल्कि पूरे प्रदेश में बाल सुरक्षा और नाबालिगों के खिलाफ अपराध रोकने के प्रयासों के लिए एक उदाहरण है। अदालत की सख्त सजा और जुर्माने के निर्णय से समाज में अपराधियों के खिलाफ चेतावनी भी भेजी गई है।






