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महोबा: जल जीवन मिशन को लेकर चरखारी विधायक और मंत्री के बीच सियासी टकराव

सड़क और पानी को लेकर सियासी संग्राम मैं आमने-सामने आए चरखारी विधायक और मंत्री स्वतंत्र देव सिंह

जन एक्सप्रेस/महोबा: उत्तर प्रदेश के जल जीवन मिशन योजना में कथित लापरवाही को लेकर चरखारी विधायक ब्रजभूषण राजपूत और जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के बीच सियासी टकराव सामने आया। शुक्रवार को महोबा जनपद मुख्यालय स्थित एक प्राइवेट कालेज के कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे मंत्री स्वतंत्र देव सिंह का रास्ता विधायक ने अपने समर्थकों के साथ रोक लिया।

विधायक ने मंत्री को जिले भर में जल जीवन मिशन से अस्त व्यस्त सड़कों और गांव-गांव में टूटी हुई टोंटियों में पानी न पहुंचने की समस्या से अवगत कराया। इसके बाद दोनों के बीच तीखी बहस हुई और समर्थक भी आपस में भिड़ गए।

विधायक ब्रजभूषण राजपूत ने कहा, “गांवों में पानी नहीं पहुंच रहा है। यह योजना विफल हो चुकी है। जनता के हित के लिए मुझे किसी भी हद तक जाना पड़े तो जाना पड़ेगा।” उन्होंने यह भी बताया कि यह शिकायतें उन्हें लंबे समय से मिल रही थीं और उन्होंने सदन में भी इस मुद्दे को उठाया है।

मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने विधायक से पूछा कि कौन से गांवों में पानी नहीं पहुंच रहा है। विधायक ने स्पष्ट किया कि यह केवल दो-चार गांव की समस्या नहीं है, बल्कि कई गांवों में टोंटियों में पानी नहीं पहुँच रहा है। इसके बाद मंत्री ने आश्वासन दिया कि कार्यक्रम के बाद वे स्वयं गांव का निरीक्षण करेंगे और जिम्मेदार अधिकारियों को निलंबित करेंगे।

दोनों नेताओं के समर्थकों की नारेबाजी और हंगामे के कारण पुलिस ने कलेक्ट्रेट के गेट पर प्रवेश रोक दिया। इसके बाद विधायक और मंत्री अधिकारियों और ग्राम प्रधानों के साथ बैठक के लिए डीएम कार्यालय पहुंचे।

विधायक ने कहा, “यह प्रधानमंत्री मोदी की योजना है। इसे सफल कराने के लिए मैं लगातार प्रयासरत हूं। जनता के हित में किसी को भी रोकना पड़े तो मैं रोकूंगा। मेरे लिए जनता की प्राथमिकता सबसे महत्वपूर्ण है।”

इस घटना ने क्षेत्र में सरकार की किरकिरी कर दी है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद सड़क और पानी जैसी बुनियादी समस्याओं पर केंद्रित है, लेकिन इसका असर सरकार की छवि पर भी पड़ रहा है।

मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने आश्वासन दिया कि संबंधित गांवों में निरीक्षण के बाद जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और योजना को दुरुस्त किया जाएगा।

इस घटना ने जनता और मीडिया दोनों का ध्यान खींचा है। स्थानीय निवासियों ने भी विधायक की पहल की सराहना की है और कहा कि जनता के काम के लिए ऐसे संघर्ष जरूरी हैं।

महोबा में यह विवाद दिखाता है कि सरकारी योजनाओं की निगरानी और पारदर्शिता कितनी महत्वपूर्ण है। दोनों नेताओं का आमने-सामने आना और जनता के मुद्दों को सीधे उठाना राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।

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