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जौनपुर में पत्रकारों का बड़ा विरोध: पुलिस मीडिया सेल से दूरी, एसपी की कार्यप्रणाली पर सवाल

जन एक्सप्रेस/जौनपुर: उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में पुलिस और मीडिया के बीच टकराव की स्थिति सामने आई है। जिले के सभी पत्रकारों ने पुलिस मीडिया सेल के व्हाट्सएप ग्रुप को छोड़ दिया है, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यह कदम जौनपुर पुलिस की कार्यप्रणाली से नाराज़गी के चलते उठाया गया है।

पत्रकारों का आरोप है कि उन्हें किसी भी घटना या मामले में समय पर पुलिस की आधिकारिक बाइट उपलब्ध नहीं कराई जाती। मीडिया सेल का उद्देश्य ही सूचना को पारदर्शी तरीके से साझा करना होता है, लेकिन जौनपुर में यह व्यवस्था पूरी तरह से असफल होती दिख रही है।

सबसे बड़ा आरोप यह है कि पुलिस के CUG नंबर पर कॉल करने के बावजूद फोन रिसीव नहीं किया जाता। इससे न केवल खबरों की पुष्टि में देरी होती है, बल्कि अफवाहों के फैलने की भी संभावना बढ़ जाती है। पत्रकारों का कहना है कि कई बार गंभीर घटनाओं में भी उन्हें घंटों तक इंतजार करना पड़ता है, लेकिन पुलिस की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिलती।

इस स्थिति से नाराज़ पत्रकारों ने सामूहिक रूप से पुलिस मीडिया सेल के ग्रुप को छोड़ने का फैसला लिया। उनका कहना है कि जब मीडिया सेल से कोई सहयोग नहीं मिल रहा, तो ऐसे प्लेटफॉर्म का कोई औचित्य नहीं रह जाता।

पत्रकारों ने यह भी सवाल उठाया है कि आखिर जौनपुर पुलिस बयान देने से क्यों बच रही है। क्या किसी मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है, या फिर यह केवल लापरवाही का मामला है? इन सवालों ने पूरे जिले में चर्चा का माहौल बना दिया है।

मीडिया और पुलिस के बीच बेहतर तालमेल किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बेहद जरूरी होता है। जहां मीडिया जनता तक सही और सटीक जानकारी पहुंचाता है, वहीं पुलिस की जिम्मेदारी होती है कि वह पारदर्शिता बनाए रखे। लेकिन जौनपुर में मौजूदा हालात इस संतुलन को बिगाड़ते नजर आ रहे हैं।

स्थानीय पत्रकारों ने चेतावनी दी है कि यदि स्थिति में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो वे इस मुद्दे को उच्च अधिकारियों तक ले जाएंगे। साथ ही, उन्होंने मांग की है कि मीडिया सेल को सक्रिय और जवाबदेह बनाया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति न बने।

यह मामला अब सिर्फ जौनपुर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे प्रदेश में मीडिया और पुलिस के रिश्तों पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस विवाद को कैसे सुलझाता है और क्या पत्रकारों की मांगों पर कोई ठोस कदम उठाया जाता है या नहीं।

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