उत्तराखंडदेहरादून

उत्तराखंड में नौनिहालों पर बढ़ता मोटापे का खतरा

2.1% से बढ़कर 3.4% पहुंचा आंकड़ा, 5-2-1-0 नियम से मिल सकता है बचाव

जन एक्सप्रेस/ देहरादून। आधुनिक जीवनशैली, फास्ट फूड की बढ़ती आदत और स्क्रीन टाइम के बढ़ते प्रभाव ने बच्चों की सेहत पर गंभीर असर डालना शुरू कर दिया है। उत्तराखंड में पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में मोटापे के मामलों में चिंताजनक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (2019–21) के अनुसार राज्य में इस आयु वर्ग के बच्चों में अधिक वजन/मोटापा 2.1 प्रतिशत से बढ़कर 3.4 प्रतिशत हो गया है। हरिद्वार जनपद में यह दर 7 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो प्रदेश में सर्वाधिक है।
मोटापा: सिर्फ रूप-रंग नहीं, गंभीर बीमारी
इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (उत्तराखंड शाखा) के सचिव एवं हिमालयन अस्पताल, जौलीग्रांट के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राकेश कुमार का कहना है कि मोटापा अब केवल सौंदर्य से जुड़ा विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह एक गंभीर चिकित्सीय स्थिति है। समय रहते नियंत्रण न होने पर यह भविष्य में मधुमेह, हृदय रोग और उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों का कारण बन सकता है।डॉ. राकेश के अनुसार, फास्ट फूड, पैकेज्ड खाद्य पदार्थ, अधिक शक्कर और वसा युक्त भोजन, शारीरिक गतिविधियों में कमी तथा मोबाइल-टीवी पर अधिक समय बिताना मोटापे के प्रमुख कारण हैं। पारंपरिक और पौष्टिक घर के भोजन की जगह जंक फूड का बढ़ता चलन बच्चों के स्वास्थ्य के लिए खतरे की घंटी है।
5-2-1-0 नियम: स्वस्थ जीवनशैली का सरल मंत्र
बाल रोग विशेषज्ञों ने मोटापे से बचाव के लिए 5-2-1-0 नियम अपनाने की सलाह दी है—
5 – प्रतिदिन 5 या उससे अधिक फल और सब्जियों का सेवन
2 – स्क्रीन टाइम 2 घंटे से कम
1 – रोज कम से कम 1 घंटा सक्रिय खेल या व्यायाम
0 – शुगर युक्त कोल्ड ड्रिंक का पूरी तरह त्याग
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि परिवार इस सरल नियम को दिनचर्या का हिस्सा बना लें तो बच्चों में मोटापे की बढ़ती समस्या पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है।
अभिभावकों की भूमिका सबसे अहम
डॉ. राकेश का कहना है कि बच्चों में स्वस्थ आदतें विकसित करने की शुरुआत घर से होती है। संतुलित और पौष्टिक भोजन, नियमित दिनचर्या, आउटडोर खेलकूद को बढ़ावा और अभिभावकों का सकारात्मक उदाहरण बच्चों को स्वस्थ भविष्य की ओर ले जा सकता है।
विश्व मोटापा दिवस जैसे अवसरों का उद्देश्य भी लोगों में जागरूकता फैलाना और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है, ताकि आने वाली पीढ़ी को मोटापे और उससे जुड़ी गंभीर बीमारियों से सुरक्षित रखा जा सके।

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