
जन एक्सप्रेस/पुरोला: उत्तरकाशी जिले के पुरोला नगर क्षेत्र में गैस सिलेंडर की किल्लत ने एक गरीब मजदूर परिवार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। वार्ड नंबर चार में रहने वाली नेपाली मूल की मजदूर महिला हिमा को अपने तीन छोटे बच्चों के लिए खाना बनाने के लिए नगर पालिका की पार्किंग में लकड़ी का चूल्हा जलाने को मजबूर होना पड़ रहा है। घर में न तो अपना गैस सिलेंडर है और न ही फिलहाल कहीं से गैस की व्यवस्था हो पा रही है।
बताया जा रहा है कि हिमा और उसके पति पिछले कई वर्षों से मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे। उनके पास खुद का गैस कनेक्शन नहीं है, इसलिए वे अक्सर आस-पड़ोस से सिलेंडर मांगकर खाना बनाते थे। लेकिन हाल ही में हिमा के पति काम के दौरान घायल हो गए और उनका इलाज देहरादून के अस्पताल में चल रहा है। ऐसे में परिवार की पूरी जिम्मेदारी हिमा के कंधों पर आ गई है।
हिमा के तीन छोटे बच्चे हैं और पति के अस्पताल में भर्ती होने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति और भी खराब हो गई है। दूसरी ओर क्षेत्र में गैस सिलेंडर की कमी और गैस बुकिंग के बीच लगभग 45 दिनों का अंतराल तय होने के कारण उन्हें कहीं से भी सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। इस वजह से मजबूर होकर हिमा ने पड़ोसियों से अनुमति लेकर नगर पालिका की पार्किंग में लकड़ी का चूल्हा जलाकर बच्चों के लिए खाना बनाना शुरू किया।
इस घटना के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में भी चिंता और सहानुभूति देखने को मिली। वार्ड सभासद करुणा बिष्ट ने मौके पर पहुंचकर हिमा और उसके बच्चों की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने तत्काल परिवार को आटा, चावल, तेल सहित अन्य जरूरी खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई और जल्द ही गैस सिलेंडर की व्यवस्था कराने का भरोसा भी दिलाया।
सभासद करुणा बिष्ट ने कहा कि गरीब परिवारों को इस तरह की समस्याओं से जूझना नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने प्रशासन से भी आग्रह किया कि क्षेत्र में गैस आपूर्ति को सुचारू किया जाए ताकि किसी भी जरूरतमंद परिवार को परेशानी न उठानी पड़े।
वहीं सामाजिक कार्यकर्ता राजपाल पंवार, अंकित पंवार, नवीन गैरोला और बलदेव रावत ने भी इस मामले पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि गैस आपूर्ति की किल्लत का सबसे ज्यादा असर गरीब और मजदूर वर्ग पर पड़ रहा है। यदि समय पर गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं होंगे तो ऐसे परिवारों को मजबूर होकर लकड़ी या अन्य पारंपरिक तरीकों से खाना बनाना पड़ेगा, जिससे कई तरह की समस्याएं खड़ी हो सकती हैं।
स्थानीय लोगों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि सुदूरवर्ती और पहाड़ी क्षेत्रों में गैस आपूर्ति को नियमित और सुचारू बनाया जाए, ताकि गरीब और मजदूर परिवारों को इस तरह की कठिन परिस्थितियों का सामना न करना पड़े।







