उत्तराखंडपुरोला

यमुना घाटी में राज्य आंदोलनकारियों की नई कार्यकारिणी का गठन.

मांगों को लेकर मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन.

जन एक्सप्रेस/पुरोला: उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों की भावनाओं और उनके हकों की लड़ाई को तेज करने के लिए सोमवार को चिन्हित उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी समिति की यमुना घाटी जिला इकाई का पुनर्गठन किया गया। बैठक में सर्वसम्मति से नई टीम का चयन करने के साथ ही मुख्यमंत्री को अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर ज्ञापन भी भेजा गया।

नई कार्यकारिणी का विवरण: किसे मिली क्या जिम्मेदारी?

बैठक में संगठन की मजबूती के लिए एक विस्तृत कार्यकारिणी का गठन किया गया, जिसमें अनुभवी और सक्रिय सदस्यों को जगह दी गई है:

  • अध्यक्ष: पृथ्वीराज कपूर

  • उपाध्यक्ष: जयवीर सिंह, कौशल किशोर और मंगल राणा

  • महासचिव: गुरुदेव सिंह रावत

  • सचिव: उर्मिला रावत, मनमोहन सिंह चौहान और पूर्ण फरसवाण

  • कोषाध्यक्ष: गोविंदराम नौटियाल

  • मीडिया प्रभारी: विजय पाल सिंह रावत, गणेश स्मोला और देवेंद्र नौटियाल

  • कानूनी सलाहकार: सोवेंद्र सिंह राणा, विनोद सिंह रावत और देवेंद्र सिंह राणा

  • प्रचार मंत्री: लक्ष्मी प्रसाद सिंह (हरिकृष्ण), कंवर सिंह पंवार और अनिल कंडवाल

इसके साथ ही प्रदेश कार्यसमिति में अतोल सिंह रावत, राजेंद्र सिंह रावत और अमीचंद शाह को शामिल किया गया है।

मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन: ये हैं प्रमुख मांगें

कार्यकारिणी गठन के बाद, उपजिलाधिकारी (SDM) पुरोला के माध्यम से मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन प्रेषित किया गया। आंदोलनकारियों ने सरकार के सामने निम्नलिखित मांगें रखीं:

  1. क्षैतिज आरक्षण: चिन्हित आंदोलनकारियों के आश्रितों को परीक्षाओं में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का लाभ सुनिश्चित किया जाए।

  2. पेंशन वृद्धि: सम्मान पेंशन में की गई बढ़ोतरी का बकाया भुगतान जल्द से जल्द किया जाए।

  3. सुविधाएं: सरकारी अतिथि गृहों में आंदोलनकारियों को निर्धारित रियायती दरों पर रुकने की सुविधा मिले।

  4. स्वरोजगार और ऋण: जिला स्तर पर स्वरोजगार योजनाओं और ऋण में दी गई छूट को प्रभावी रूप से लागू किया जाए।

  5. आउटसोर्सिंग में प्राथमिकता: स्थानीय युवाओं और आंदोलनकारियों के आश्रितों को सरकारी आउटसोर्सिंग नियुक्तियों में वरीयता दी जाए।

  6. परिवहन: यमुना घाटी क्षेत्र में परिवहन निगम की नई बसों का संचालन शुरू किया जाए।

सरकार को चेतावनी

आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि सरकार द्वारा घोषित सुविधाओं का लाभ केवल कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने मांग की कि जमीनी स्तर पर इन योजनाओं को लागू किया जाए, अन्यथा वे आंदोलन के लिए विवश होंगे।

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