
जन एक्सप्रेस/नई टिहरी: भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की एससी,एसटी परियोजना के तहत वीर चंद्र सिंह गढ़वाली उत्तराखंड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय भरसार द्वारा जाखणीधार ब्लॉक के मंदार,ढुंग,कस्तल के कृषकों को वर्मी कंपोस्ट इकाइयों का वितरण किया गया। उन्होंने किसानों को वर्मी कंपोस्ट का प्रयोग की जानकारी देते हुए कहा कि इससे उनकी आय में वृद्धि होगी।
विवि के वानिकी महाविद्यालय रानीचौरी के वैज्ञानिक डॉ.पदम सिंह और डॉ.राजेश बिजल्वाण ने कुलपति प्रो.परविंदर कौशल के निर्देश पर मंदार में 17,ढुंग,कस्तल में 15-15 अनुसूचित जाति के किसानों को वर्मी कंपोस्ट पिट,सेड नेट,बैग,6-6 पाइप,टी शर्ट,डायरी पेन आदि सामग्री वितरित की। उन्होंने कहा कि यह सामग्री किसानों के जैविक खाद बनाने का काम आएगी। इसके बाद विभिन्न कृषि यंत्र भी वितरित किए जाएंगे। उन्होंने तकनीकी सशक्तिकरण एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों के प्रसार पर विशेष बल दिया। डॉ. पदम सिंह ने बताया विवि का सतत प्रयास रहता कि पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि यंत्रीकरण को अधिकाधिक बढ़ावा देना। ताकि किसान अपने कृषि कार्यों को सुगमता पूर्वक करें।
बताया कि वर्मी कंपोस्ट इकाइयों के उपयोग से किसान जैविक खेती को बढ़ावा दे सकते हैं। जिससे मिट्टी की उर्वरता में सुधार होगा और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी। साथ ही वितरित कृषि उपकरणों से खेत की तैयारी, निराई-गुड़ाई,फसल संरक्षण कार्य अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा। प्रधान विजय सिंह रावत,दिनेश लाल शाह,दिनेश कुमार,जसपाल बगियाल सतपन सिंह बगियालआदि ने विवि के प्रयासों की सराहना करते हुए भविष्य में भी कृषि उपज बढ़ाने के लिए सहयोग देने की अपेक्षा की।






