
जन एक्सप्रेस/विकासनगर: गर्मियों के मौसम की शुरुआत के साथ ही जंगलों को आग (वनाग्नि) की विभीषिका से सुरक्षित रखने के लिए वन विभाग ने कमर कस ली है। मंगलवार को चकराता वन प्रभाग की देवघार रेंज त्यूनी परिसर में एक महत्वपूर्ण ‘वन अग्नि सुरक्षा गोष्ठी’ का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता उप प्रभागीय वनाधिकारी (SDO) शिप्रा शर्मा ने की।
वनों की सुरक्षा: एक नागरिक कर्तव्य
गोष्ठी को संबोधित करते हुए शिप्रा शर्मा ने भावुक अपील करते हुए कहा कि वन केवल सरकारी संपत्ति नहीं, बल्कि हमारी जीवनरेखा हैं। उन्होंने जोर दिया कि:
-
शुद्ध जलवायु, ऑक्सीजन और पर्यावरण संतुलन के लिए वनों का सुरक्षित रहना अनिवार्य है।
-
जंगल में आग की सूचना मिलते ही तुरंत नजदीकी वन चौकी या अधिकारियों को सूचित करें।
-
जनता और विभाग के बीच बेहतर तालमेल (Coordination) ही वनाग्नि को रोकने का एकमात्र प्रभावी रास्ता है।
साझा संपत्ति और सामूहिक संकल्प
रेंज अधिकारी शिवप्रसाद गैरोला ने गोष्ठी में उपस्थित ग्रामीणों और कर्मचारियों को तकनीकी जानकारी देते हुए कहा कि आग लगने की स्थिति में शुरुआती मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। उन्होंने स्थानीय लोगों से अपील की कि वे खेतों की सफाई के दौरान आग न जलाएं और जंगल के पास ज्वलनशील पदार्थ न छोड़ें।
“वन हमारी साझा विरासत है। यदि हम आज इन्हें नहीं बचाएंगे, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए संकट खड़ा हो जाएगा।” — शिवप्रसाद गैरोला, रेंज अधिकारी
ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी
कार्यक्रम में त्यूनी और आसपास के गांवों के जनप्रतिनिधियों व ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। सभी उपस्थित लोगों ने सामूहिक रूप से वनों की रक्षा करने और आग लगने पर तत्काल सूचना देने का संकल्प लिया। वन विभाग ने स्थानीय हेल्पलाइन नंबर और बीट अधिकारियों के संपर्क सूत्र भी साझा किए।






