नमामि गंगे की पाइपलाइन बनी ‘मजाक’! कागजों में बह रहा पानी, गांवों में सूखी नलियां
चित्रकूट के मानिकपुर क्षेत्र में पाइप बिछे, लेकिन पानी नदारद — ग्रामीणों में भारी आक्रोश

जन एक्सप्रेस/चित्रकूट/मानिकपुर।जनपद चित्रकूट के मानिकपुर तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत छेरिहाखुर्द, डांडी कोलान, छेरिहा बुजुर्ग, जारोमाफी, करौहा चितघटी तथा बारह डांडी कोलान में नमामि गंगे योजना की हकीकत ने एक बार फिर सरकारी दावों की पोल खोल दी है। यहां पाइपलाइन तो बिछा दी गई है, लेकिन नलों में पानी की एक बूंद तक नहीं पहुंच रही। ग्रामीणों का कहना है कि यह पाइप अब सुविधा नहीं, बल्कि उनकी परेशानी और सरकार की लापरवाही का प्रतीक बन गए हैं।
ग्राउंड रिपोर्ट में खुलासा, “पानी सिर्फ फाइलों में”
पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष मानिकपुर ने क्षेत्र का निरीक्षण कर जब जमीनी हकीकत देखी तो तस्वीर चौंकाने वाली सामने आई। उन्होंने बताया कि हर गांव में पाइप तो डाल दिए गए हैं, लेकिन पानी की सप्लाई आज तक शुरू नहीं हुई।“सरकारी फाइलों में भले ही हर घर नल से जल पहुंच रहा हो, लेकिन हकीकत में लोग आज भी बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं,” उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया दी।
“आज भी चोहड़ों का पानी पीने को मजबूर”
ग्रामीणों की हालत बेहद दयनीय है। लोगों का कहना है कि आज भी उन्हें चोहड़ों (गड्ढों/तालाबों) का गंदा पानी पीना पड़ रहा है। गर्मी बढ़ते ही हालात और बिगड़ने लगे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं।
“सिर्फ दिखावा, नहीं कोई सुनवाई”
पूर्व अध्यक्ष ने प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह योजना सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई है। “न जांच हो रही है, न ही कोई अधिकारी मौके पर जा रहा है। गांव आज भी बदहाल हैं और लोग मूलभूत सुविधा से वंचित हैं,” उन्होंने कहा।
जांच और कार्रवाई की मांग तेजग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो। साथ ही जल्द से जल्द पानी की सप्लाई शुरू कर लोगों को राहत दी जाए।नमामि गंगे जैसी महत्वाकांक्षी योजना अगर जमीनी स्तर पर दम तोड़ती नजर आए, तो यह न सिर्फ प्रशासनिक विफलता है बल्कि ग्रामीणों के साथ सीधा अन्याय भी है। अब देखना होगा कि जिम्मेदार कब जागते हैं और सूखी पाइपलाइनों में आखिर कब पानी दौड़ता है।






