जौनपुर में ट्रैफिक सिस्टम फेल: चालान काटने में नंबर-1, जाम खुलवाने में जीरो! आखिर कौन लेगा जिम्मेदारी?

जन एक्सप्रेस/जौनपुर: ऐतिहासिक शहर जौनपुर की सड़कें इन दिनों ‘जाम के टापू’ में तब्दील हो चुकी हैं। सिपाही रिवर से लेकर जेसीस चौराहा और ओलंदगंज तक का सफर किसी बुरे सपने जैसा हो गया है। घंटों तक जाम में फंसी जनता कराह रही है, लेकिन व्यवस्था संभालने वाला जिम्मेदार अमला सड़कों से पूरी तरह नदारद है।
शाम होते ही ट्रकों का ‘तांडव’ और रेंगती जनता
जैसे ही सूरज ढलता है, शहर की मुख्य सड़कों पर भारी ट्रकों की लंबी कतारें अपना कब्जा जमा लेती हैं। सिपाह रिवर से जेसीस चौराहा और ओलंदगंज के बीच का इलाका ट्रकों के कारण पूरी तरह ब्लॉक हो जाता है। इनके बीच फंसे दोपहिया वाहन और एंबुलेंस तक रास्ता तलाशते नजर आते हैं। विशेष रूप से ओलंदगंज से कसेरी बाजार और कोतवाली क्षेत्र तक की स्थिति इतनी भयावह है कि पैदल चलना भी दूभर है।
सिर्फ चालान तक सीमित रह गई ट्रैफिक पुलिस?
स्थानीय नागरिकों का सीधा आरोप है कि ट्रैफिक पुलिस का काम अब केवल चालान काटने तक ही सिमट गया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देशों की आड़ में आम जनता का हेलमेट और नो पार्किंग के नाम पर चालान तो धड़ल्ले से काटा जा रहा है, लेकिन जहाँ वास्तव में पुलिस की मौजूदगी की जरूरत है, वहाँ सन्नाटा पसरा रहता है।
नियमों की धज्जियां उड़ाते खुद ‘रक्षक’
शहरवासियों ने आक्रोश जताते हुए कहा कि एक तरफ आम आदमी पर सख्ती की जा रही है, वहीं दूसरी ओर खुद पुलिसकर्मी और रसूखदार लोग यातायात नियमों को ठेंगा दिखाते नजर आते हैं। जनता का सवाल है कि क्या नियम केवल साधारण नागरिकों के लिए हैं?
एसएसपी से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
जौनपुर की त्रस्त जनता ने अब सीधे वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। लोगों का कहना है कि:
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प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक पुलिस की नियमित तैनाती की जाए।
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व्यस्त समय में भारी वाहनों के प्रवेश पर सख्ती से रोक लगे।
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यातायात व्यवस्था केवल कागजी बैठकों तक सीमित न रहकर जमीनी स्तर पर दिखे।






